भाजपा ने पुराने तो विपक्ष ने नए चेहरों पर लगाया दांव
सिद्धार्थनगर। जिले की पांच विधानसभा सीटों के लिए छठे चरण में होने वाले चुनाव को लेकर सरगर्मी चरम पर है। पिछले चुनाव में चार सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। एक सीट पर उसके सहयोगी अपना दल एस को कामयाबी मिली थी। भाजपा ने पिछली बार जीत दर्ज करने वाले चारों प्रत्याशियों को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा है तो वहीं अपना दल एस ने प्रत्याशी बदल दिया है।
अन्य विपक्षी पार्टियों की बात करें तो सपा ने दो सीटों पर पुराने चेहरों पर दांव लगाया है और बाकी तीन सीटों पर नए प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में सपा से गठबंधन के चलते किसी भी सीट पर कांग्रेस नहीं लड़ी थी। इस बार नए चेहरों के साथ चुनावी समर में उतरी है, जबकि बसपा पांचों विधानसभा सीटों पर नए प्रत्याशियों के सहारे मैदान में जोर-आजमाइश कर रही है। दल बदल कर चुनावी अखाड़े में उतरे कुछ नेताओं ने लड़ाई को और भी रोचक बना दिया है।
कपिलवस्तु (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधायक श्यामधनी राही को एक बार फिर चुनावी मैदान में उतारा है। इस सीट पर सपा ने भी वर्ष 2017 में पार्टी के प्रत्याशी रहे पूर्व विधायक विजय पासवान को टिकट दिया। बसपा ने पिछली बार प्रत्याशी रहे चंद्रभान की जगह सपा से पार्टी में शामिल हुए कन्हैया कन्नौजिया को टिकट दिया है। कांग्रेस ने देवेंद्र सिंह गुड्डू पर दांव लगाया है। बांसी विधानसभा सीट पर भाजपा को छोड़कर सारे प्रमुख दलों ने अपने प्रत्याशियों को बदल दिया है। भाजपा ने जय प्रताप सिंह को इस बार के चुनाव में भी टिकट दिया है। सपा ने 29 वर्षों के बाद अपने पुराने प्रत्याशी को बदल दिया है। पिछले छह चुनावों में बांसी विधानसभा में सपा का चेहरा रहे लालजी यादव की जगह पार्टी ने नवीन उर्फ मोनू दूबे को इस बार मैदान में उतारा है। बसपा ने वर्ष 2017 में पार्टी प्रत्याशी रहे लालचंद्र निषाद की जगह राधेश्याम पांडेय को टिकट दिया है। कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी किरन शुक्ला को टिकट देकर चुनावी रण में उतारा है।
डुमरियागंज विधानसभा की बात करें तो यहां भी बांसी विधानसभा की तर्ज पर विपक्षी दलों ने नए चेहरों को आगे किया है। भाजपा ने मौजूदा विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं, सपा ने बसपा का दामन छोड़कर पार्टी में शामिल हुई सैय्यदा खातून को अपना प्रत्याशी बनाया है। वर्ष 2017 में इस सीट से सपा के टिकट पर रामकुमार उर्फ चिनकू यादव चुनाव लड़े थे। बसपा ने अशोक तिवारी को टिकट दिया है। पिछले चुनाव में सैय्यदा खातून यहां से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी थीं। कांग्रेस ने इस सीट से पहली बार महिला प्रत्याशी कांती पांडेय को प्रत्याशी घोषित किया है। इटवा विधानसभा सीट पर भाजपा ने मौजूदा विधायक डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी तो वहीं सपा ने भी अपने पुराने प्रत्याशी माता प्रसाद पांडेय को मैदान में उतारा है। बसपा ने भाजपा से आए हरिशंकर सिंह को टिकट दिया है। वहीं, कांग्रेस ने इसी सीट से बसपा के टिकट पर वर्ष 2017 का चुनाव लड़ चुके अरशद खुर्शीद को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में तो सारे दलों के नए चेहरे चुनावी मैदान में हैं। भाजपा के सहयोगी अपना दल की ओर से विनय वर्मा मैदान में हैं।
पिछले चुनाव में यहां से चौधरी अमर सिंह को टिकट मिला था और वह जीते भी थे। इस बार वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ताल ठोक रहे हैं। सपा ने पिछले बार के प्रत्याशी उग्रसेन सिंह को टिकट न देने के साथ इस सीट को सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के लिए छोड़ने का निर्णय लिया। नए चेहरे प्रेमचंद निषाद, सुभासपा की ओर चुनावी मैदान में हैं। बसपा ने भी नए चेहरे राधारमण त्रिपाठी को टिकट दिया है। वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर यहां से जमील सिद्दीकी चुनाव लड़े थे। कांग्रेस ने रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी को टिकट दिया है। लोकतंत्र के इस महाकुंभ में नए व पुराने चेहरों के साथ दल-बदल कर आए नेताओं की मौजूदगी देखने को मिल रही है। सभी प्रत्याशी अपनी चुनावी नैय्या पार लगाने के लिए जी-जान से जुटे हैं।