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Exclusive: धरोहर के रूप में संरक्षित होगी परमहंस योगानंद की जन्मस्थली, शासन को भेजा गया प्रस्ताव

Tue, 26 Dec 2023 10:31 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि योगगुरु परमहंस योगानंद की जन्मस्थली को संरक्षित और सुव्यवस्थित करने की योजना है। उनके फॉलोअर्स पूरी दुनिया में हैं। पयर्टन के लिहाज से यह बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। कई विदेशी भी उनकी जन्मस्थली को देखने आते हैं। जिस घर में वे रहते थे, वह करीब 1200 वर्ग मीटर में है।
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नखास स्थित इसी घर में रहते थे परमहंस योगानंद। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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दुनियाभर में योग का प्रचार-प्रसार करने वाले योगगुरु परमहंस योगानंद (मुकुंद लाल घोष) की जन्मस्थली और उनसे जुड़ीं वस्तुओं को धरोहर के रूप में प्रदेश सरकार संरक्षित करेगी। शहर के नखास स्थित घर के जिस कमरे में उनका जन्म हुआ था, उसे भी धरोहर के तौर पर संरक्षित कर परिसर को विकसित करने की योजना है। घर में अभी भी उनकी खड़ाऊं, रुद्राक्ष की मालाएं, लैंप और पुस्तकें सुरक्षित हैं। परिसर में एक संग्रहालय और योग केंद्र भी बनाने की तैयारी है।

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परमहंस योगानंद का जन्म शहर के नखास चौक, कोतवाली के बगल में स्थित एक मकान में पांच जनवरी 1893 को हुआ था। उनके पिता भगवती चरण घोष रेलवे में नौकरी करते थे। सपरिवार नवाब शेख अब्दुल रहीम उर्फ अच्छन बाबू के यहां किराए पर रहते थे।

अच्छन बाबू के पुत्र मोहम्मद अलाउद्दीन उर्फ शेखू बताते हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कई सामान आज भी सुरक्षित हैं। मेरे पिता ने अमानत के तौर पर इसे रखा। उनकी जन्मस्थली को धरोहर के रूप में संरक्षित और भव्यता देने की योजना हम लोगों के लिए गौरव की बात है।
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इस संबंध में तहसीलदार सदर विकास सिंह ने बताया कि योगगुरु परमहंस योगानंद जिस घर में रहते थे, उसका निरीक्षण किया गया है। जमीन की पैमाइश की गई है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।

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आठ वर्ष की उम्र में गोरखनाथ मंदिर में जाकर लगाते थे ध्यान
परमहंस योगानंद आठ भाई-बहनों में चौथे नंबर पर थे। उनकी बड़ी बहन रमा से ही सभी भाइयों ने प्रारंभिक दीक्षा ली। घर के सामने ही एक नीम का पेड़ था, उसी के नीचे भाई-बहन बैठकर पढ़ते थे। बकौल शेखू -मेरे दादा बताते थे कि आठ साल की उम्र से ही परमहंस योगानंद का मन ध्यान की ओर लगने लगा। अक्सर वह गोरखनाथ मंदिर जाकर ध्यान लगाते थे। जब वह 12 साल के हुए तो उनके पिता का स्थानांतरण कराची हो गया। पिता के साथ वह भी चले गए।

डीएम कृष्णा करुणेश ने कहा कि योगगुरु परमहंस योगानंद की जन्मस्थली को संरक्षित और सुव्यवस्थित करने की योजना है। उनके फॉलोअर्स पूरी दुनिया में हैं। पयर्टन के लिहाज से यह बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। कई विदेशी भी उनकी जन्मस्थली को देखने आते हैं। जिस घर में वे रहते थे, वह करीब 1200 वर्ग मीटर में है। वहां अभी तीन-चार परिवार रहते हैं। शासन को एक प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है।

 
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