नखास स्थित इसी घर में रहते थे परमहंस योगानंद।
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दुनियाभर में योग का प्रचार-प्रसार करने वाले योगगुरु परमहंस योगानंद (मुकुंद लाल घोष) की जन्मस्थली और उनसे जुड़ीं वस्तुओं को धरोहर के रूप में प्रदेश सरकार संरक्षित करेगी। शहर के नखास स्थित घर के जिस कमरे में उनका जन्म हुआ था, उसे भी धरोहर के तौर पर संरक्षित कर परिसर को विकसित करने की योजना है। घर में अभी भी उनकी खड़ाऊं, रुद्राक्ष की मालाएं, लैंप और पुस्तकें सुरक्षित हैं। परिसर में एक संग्रहालय और योग केंद्र भी बनाने की तैयारी है।
परमहंस योगानंद का जन्म शहर के नखास चौक, कोतवाली के बगल में स्थित एक मकान में पांच जनवरी 1893 को हुआ था। उनके पिता भगवती चरण घोष रेलवे में नौकरी करते थे। सपरिवार नवाब शेख अब्दुल रहीम उर्फ अच्छन बाबू के यहां किराए पर रहते थे।
अच्छन बाबू के पुत्र मोहम्मद अलाउद्दीन उर्फ शेखू बताते हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए कई सामान आज भी सुरक्षित हैं। मेरे पिता ने अमानत के तौर पर इसे रखा। उनकी जन्मस्थली को धरोहर के रूप में संरक्षित और भव्यता देने की योजना हम लोगों के लिए गौरव की बात है।
इस संबंध में तहसीलदार सदर विकास सिंह ने बताया कि योगगुरु परमहंस योगानंद जिस घर में रहते थे, उसका निरीक्षण किया गया है। जमीन की पैमाइश की गई है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
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