उन्होंने बताया कि कुछ समय तक ओपीडी न चलने के कारण आईयूसीडी की संख्या 9179 के सापेक्ष महज 5820 रही। जहां पिछले वित्तीय वर्ष (2019-2020) में 487 नसबंदी हुई थी वहीं गुजरे वित्तीय वर्ष में 423 नसबंदी हुई। दोनों वित्तीय वर्ष में पुरुष नसबंदी एक-एक रही।
अंतरा के प्रथम डोज 2325 के सापेक्ष 1393, दूसरे डोज 1245 के सापेक्ष 770, तीसरे डोज 480 के सापेक्ष 422 और चौथे डोज 222 के सापेक्ष 470 डोज अंतरा इंजेक्शन महिलाओं ने शहर में चुना। कोविड के सेकेंड वेब में भी ऑन डिमांड सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
डॉ. नंद कुमार ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष की शुरूआत कोविड से ही हुई है और कोविड का कठिन समय चल रहा है। फिर भी आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया था कि अस्थायी साधन लाभार्थियों को मुहैय्या कराती रहें। आशा कार्यकर्ता लाभार्थी दंपत्ति के संपर्क में रहती हैं और मांग पर उन्हें परिवार नियोजन के अस्थाई साधन उपलब्ध कराए गए। पीएसआई-टीसीआईएचसी संस्था के स्वयंसेवक इन कार्यक्रमों में शहर के भीतर सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
कोविड प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान
शाहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की प्रभारी डॉ. हरप्रित का कहना है कि आशा और एएनएम को निर्देशित किया गया है कि जो भी सेवा दें उनमें प्रोटोकॉल का विशेष ध्यान रखें। लाभार्थी से दो गज दूरी रखना है और मॉस्क का उपयोग अवश्य करें। किशोरियों और दंपत्ति से संबंधित कार्यक्रम कोविड काल में भी जारी रखे गए।
अलीनगर दक्षिणी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता संध्या यादव ने बताया कि परिवार नियोजन की अस्थायी सेवाएं लॉकडाउन की अवधि में भी मांग करने पर उपलब्ध रहीं। जहां कहीं से भी मांग की गई, वहां सुविधाएं पहुंचाई गईं।