ध्वनि प्रदूषण बड़ा कारण
प्रो. विनय ने बताया कि पक्षियों को प्रजनन के लिए शांत वातावरण की जरूरत होती है। शहर में वाहनों के बढ़ते शोर की वजह से उन्हें गांव की तरफ पलायन करना पड़ रहा है। गीडा में उद्योग और घरों में एसी बढ़ने की वजह से शहर का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा है। यह भी पक्षियों के पलायन का बड़ा कारण है। वह ठंडे मौसम में ही रहना पसंद करते हैं। उन्होंने बताया कि अन्य जगहों की अपेक्षा गोरखपुर का वातावरण पक्षियों के लिए ठीक है। ग्रामीण इलाकों में 363 तरह की प्रजातियां मौजूद हैं।
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गोरखपुर में पाए जाने वाले पक्षी
गौरेया, कॉमन कूट, धनेष, बगुले, बत्तख, टिटिहरी, मैना, कौवा, रूफस ट्रीपी, सनबर्ड, मोर, बुलबुल, कोयल, भारतीय रॉबिन, काला भुजंगा, गुलाबी मैना, नीलकंठ आदि कुछ ऐसे पक्षी हैं जो गोरखपुर में देखे जाते हैं। इसमें कुछ बड़े पैमाने पर पाए जाते हैं, कुछ दुर्लभ तो कुछ मौसमी और प्रवासी हैं।
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कम आए मौसमी पक्षी
रामगढ़ताल में हर साल नवंबर-दिसंबर में बड़ी संख्या में मौसमी और प्रवासी पक्षी आते हैं। ठंड के मौसम में ही इनकी ब्रीडिंग होती है। इस साल ठंड कम पड़ने की वजह से इनकी संख्या बहुत कम है। चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि गोरखपुर में पक्षियों की कई प्रजातियां मौजूद हैं। प्रवासी पक्षी हर साल नवंबर खत्म होने तक रामगढ़ताल में आ जाते थे। इस साल ठंड में देरी हुई तो नहीं आए। ठंड के मौसम में ही इनकी ब्रीडिंग होती है इसीलिए यह रामगढ़ताल को चुनते हैं।