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Exclusive: ढूंढे नहीं मिल रही गोरखपुर नगर निगम के आय-व्यय की रोकड़ बही

Fri, 05 Jan 2024 02:26 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।

सार

नगर निगम में पिछले दिनों दो फर्मों की ओर से किए गए कार्यों से जुड़ीं फाइलें गायब हो गईं। अगर रोकड़बही में टेंडर स्वीकृत के समय तय रेंट और अन्य रिकाॅर्ड दर्ज होते तो फाइल गायब होने के बाद भी कितने राजस्व की गड़बड़ी और हेरफेर की गई, यह आसानी से पता किया जा सकता था।
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गोरखपुर नगर निगम। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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 नगर निगम की आय और व्यय का आधिकारिक रिकाॅर्ड रोकड़बही कई वर्षों से अपडेट नहीं की जा रही है। खबर है कि ऐसा बिना शासन के निर्देश के किया गया है। मामला तब खुला, जब मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने लेखा विभाग से जानकारी मांगी। अब मेयर ने नगर आयुक्त से पूछा है कि लेखा विभाग ने इसे क्यों और किसके कहने पर बंद किया है?

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दरअसल, नगर निगम के निर्माण, स्वास्थ्य कर, प्रधान कार्यालय, चुंगी विभाग, प्रकाश और विधि विभाग की ओर से आय और व्यय के प्रतिदिन खर्च का ब्योरा लेखा विभाग की सामान्य रोकड़बही में दर्ज किया जाता है, लेकिन कई वर्षों से इसमें आय-व्यय की कोई जानकारी अपडेट नहीं की गई है। नगर निगम में 118 अधिकारी और कर्मचारियों की तैनाती है। इनका वेतन राज्य वित्त आयोग की तरफ से आता है। इसके अलावा कर जमा, जुर्माना और अन्य मद में अर्जित आय को बोर्ड फंड कहा जाता है।

नगर निगम नियमावली के अनुसार, अर्जित आय की सूचना लेखा विभाग में दी जाती है और प्रतिदिन के हिसाब से इसे आय पक्ष की रोकड़बही में दर्ज किया जाता है। ऐसे ही, नगर निगम ने अगर किसी मद में पांच लाख रुपये की निविदा को स्वीकृति दी तो इसपर धनराशि जारी करने पर व्यय पक्ष की रोकड़बही के साथ ही लेखा रजिस्टर में दर्ज करना होता है।
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मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने पांच माह पहले नगर निगम में पदभार ग्रहण किया था। सूत्र बताते हैं कि ज्वाइनिंग के बाद जब उन्होंने सामान्य रोकड़बही मांगी तो लेखा विभाग प्रस्तुत नहीं कर सका।

 

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रोकड़बही अपडेट होती तो खुल जाते दो फर्मों के मामले
नगर निगम में पिछले दिनों दो फर्मों की ओर से किए गए कार्यों से जुड़ीं फाइलें गायब हो गईं। अगर रोकड़बही में टेंडर स्वीकृत के समय तय रेंट और अन्य रिकाॅर्ड दर्ज होते तो फाइल गायब होने के बाद भी कितने राजस्व की गड़बड़ी और हेरफेर की गई, यह आसानी से पता किया जा सकता था। यही कारण है कि फर्मों ने करीब तीन करोड़ रुपये से अधिक की गड़बड़ी मनमाने तरीके से की। सूत्र बताते हैं कि इसकी जानकारी संबंधित विभाग के बाबुओं को भी थी। इसी वजह से मनमाने तरीके से काम का आवंटन करवाकर उसकी फाइल ही लापरवाही से रखी गई।

पिछले वर्ष नगर निगम में आया फंड
  • राज्य वित्त आयोग- 27 करोड़ रुपये
  • 15वां वित्त आयोग- 50 करोड़ रुपये (लगभग)
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