दरअसल, बिजली निगम में बिजली बिल के नाम पर गड़बड़ी की शिकायतें लगातार मिलती रहती हैं। चर्चा है कि जेएमटी और मीटर रीडर मिलकर हैवी कनेक्शनों पर खेल करते हैं। जैसे, उपभोक्ता के परिसर में 5 से 9 किलोवाट का कनेक्शन है और उनके परिसर में बिजली की खपत भी खूब होती है। ऐसे में उपभोक्ता को लाभ दिलाने के लिए जेएमटी और मीटर रीडर मिलकर न तो उसके परिसर में बिल बनाते हैं और न ही जांच करते हैं।
ऐसे बिलों पर अब कारपोरेशन के साथ मुख्य अभियंता की नजर सख्त हो गई है। अधीक्षण अभियंता शहरी ने तो इस मिलीभगत को देखते हुए 5 से 9 किलोवाट तक के हैवी कनेक्शनों पर बिना उनकी अनुमित लिए मीटर बदलने पर रोक लगा दी है।
मुख्य अभियंता आशू कालिया ने कहा कि बड़े कनेक्शनों पर सांठगांठ कर कारपोरेशन को वित्तीय क्षति पहुंचाने की शिकायतें सामने आई हैं। 5 से 9 किलोवाट तक के कनेक्शनों पर गोपनीय जांच करवाई जाएगी। इनका बिल समय से नहीं बन रहा है तो ये बिलिंग एजेंसी की भी गलती है। अपने काम में सुधार लाएं, नहीं तो कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।