ऑनलाइन बिजली का बिल समय से जमा करने के बाद भी उपभोक्ताओं को बिजली निगम बकाएदार बना रहा है। शिकायतें लेकर जाने पर पता चल रहा कि उनके मीटर में रीडिंग स्टोर होने की वजह से बकाया दिखा रहा। जबकि उपभोक्ता समय से प्रतिमाह अपने कनेक्शन आईडी पर ऑनलाइन बिल जमा कर देते हैं।
दरअसल यूपीपीसीएल का सॉफ्टवेयर खुद पुराने बिलिंग के हिसाब से औसत बिजली खपत का बिल बनाकर सर्वर पर अपलोड कर देता है। इसी बिल को उपभोक्ता महीने का बिल मानकर भुगतान भी कर देते हैं लेकिन, मीटर की रीडिंग की गणना नहीं हो पाती।
उपभोक्ता के पते पर मीटर रीडर जाकर जब रीडिंग के अनुसार बिल बनाता है तो जमा किए बिल और रीडिंग के अनुसार बिजली बिल में अंतर देख उसके होश उड़ जाते हैं। यही इन उपभोक्ताओं के साथ भी हुआ। अब बिजली निगम की तरफ से इन्हें खंडवार बिलिंग एजेंसी के जिम्मेदारों का व्हाट्सएप नंबर दिया जा रहा। उनसे कहा जा रहा है कि अपने मीटर की रीडिंग इस नंबर पर भेज दें।
शहरी अधीक्षण अभियंता यूसी वर्मा ने कहा कि बिजली बिल ऑनलाइन जमा करने के दौरान ध्यान रखें कि उनके मीटर की रीडिंग के अनुसार बिल बना कि नहीं। खंड ने नई व्यवस्था के तहत बिलिंग एजेंसी वालों का व्हाट्सएप नंबर भी जारी किया है। उपभोक्ता अपने मीटर की रीडिंग बनाकर भेज सकते हैं और उसी के अनुसार बिल को ऑनलाइन जम कर दें।
केस 1
पैडलेगंज की मालती के नाम से उनके घर तीन किलोवाट का बिजली कनेक्शन है। उनके बेटे प्रतिमाह समय से बिजली बिल जमा कर देते हैं। दो दिन पहले मीटर रीडर ने बिल बनाया तो वे लगभग सात हजार रुपये की बकाएदार बन गईं। खंड कार्यालय जाकर पूछा तो पता चला कि उनके स्टोर रीडिंग की वजह से बकाया दिखा रहा है।
केस 2
मोहद्दीपुर के राजीव बुधवार सुबह बिजली निगम के दफ्तर पहुंचे। बताया कि प्रतिमाह समय से बिजली बिल भुगतान करने के बाद भी दो दिन पहले घर आए मीटर रीडर ने लगभग 16 हजार रुपये का बकाएदार बना दिया है। उन्हें भी रीडिंग और ऑनलाइन बिल भुगतान के बारे में जानकारी देने के साथ बिलिंग एजेंसी के जिम्मेदार का व्हाट्सएप नंबर दे दिया गया।