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लेले अइहा हो पिया सिंदुरा बंगाल से, भोजपुरी गीतों से दर्शकों को दिखाई पूर्वांचल की संस्कृति

Thu, 16 Jan 2020 12:46 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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- फोटो : अमर उजाला
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गोरखपुर महोत्सव के तहत शिल्प मेले में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बुधवार को कलाकारों ने भोजपुरी गीतों के जरिए दर्शकों को पूर्वांचल की संस्कृति का साक्षात्कार कराया। दर्शकों ने भी माटी के गीतों पर झूमकर और तालियां बजाकर कलाकारों को सम्मान दिया और उनका उत्साहवर्धन किया।  
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लोकगीत कार्यक्रम का आरंभ शशि मिश्रा ने गीत,‘ले ले अइहा हो पिया सिंदुरा बंगाल से’, ‘तोहरा से राजी न हो बलम जी’ गाकर परदेस में रहने वाले पति के लिए पत्नी की चिट्ठी की भावनाओं को प्रस्तुत किया।

साधना चतुर्वेदी ने भगवान राम के अवध नगरी लौटने की खुशी में ‘बाजे लागे आनंद बधईया हो रामा, अवध नगरी से जियावे लौटे’ गाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया।

बिंदु शुक्ला ने ‘चढ़ली उमरिया हमरी जियल कइलेबा मोहाल, कईसे के रहबे संइया कुसवा के घर में’ प्रस्तुत किया तो दर्शक झूम उठे।

बृज बिहारी दु़बे ने ‘गोरी चरचा बा सगरी बजरिया, पूर्वी हिया में हमेसा समाइल बा जाला’ गाकर प्रेमी दिलों को थिरकने पर मजबूर किया। कार्यक्रम का संचालन हरि प्रसाद सिंह ने किया।
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