गोरखपुर पहुंचे गेस्पा और फेनी साथ में प्रखर रंजन और उनका परिवार।
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बेल्जियम के रहने वाले दंपती गेस्पा और फेनी साइकिल से नौ देशों की यात्रा कर बाबा गोरखनाथ की नगरी पहुंचे। नाथ संप्रदाय के इतिहास को समझा और शहर की तारीफ की। अपने 29 घंटों के प्रवास के दौरान उन्हें गोरखपुरिया मेहमाननवाजी खूब भाई। इसके बाद वह भारत में अपनी यात्रा का आखिरी पड़ाव छोड़ फरेंदा के रास्ते नेपाल के लिए निकल गए।
बेल्जियम के रहने वाले मैकेनिकल इंजीनियर गेस्पा और शिक्षक फेनी का विवाह वर्ष 2021 में हुआ है। शादी के बाद ही इस जोड़े ने साइकिल से पूरी दुनिया का भ्रमण करने की योजना बनाई। बस फिर क्या था, एक दूसरे का साथ पाकर दोनों 10 महीने पहले घर से निकले। फ्रांस, क्रोएशिया, ग्रीस, इस्तांबूल, टर्की, अजरबैजान, ईरान, दुबई, ओमान सहित कई देशों की यात्रा करते हुए दंपती भारत पहुंचा। वे यहां इंद्रप्रस्थपुरम के आर्किटेक्ट दंपती प्रखर रंजन और शिवानी के वहां रुके थे।
अमर उजाला से बातचीत में प्रखर रंजन ने बताया कि गुजरात में नौकरी के दौरान वो साइकिलिंग करने वाले ग्रुप से जुड़े थे। वहां, साइकिलिंग की एक कम्यूनिटी वाट्सएप के माध्यम से पूरी दुनिया के साइकिल चलाने वाले लोगों से जुड़ी है। जब कोई साइकिल चलाने वाले शख्स उस कम्यूनिटी से जुड़े किसी सदस्य के देश में जाता है तो वहां उनका आतिथ्य स्वीकार करता है।
प्रखर ने भले ही गुजरात और साइकिलिंग से दूरी बना ली, मगर अभी भी उस कम्यूनिटी के सदस्य हैं। गेस्पा और फेनी ने उनसे संपर्क किया तो उन्होंने सहर्ष उन्हें अपने घर आमंत्रित किया। जिसके बाद दंपती 23 अप्रैल को सुबह 10 बजे उनके घर पहुंचे और 24 दिसंबर को दोपहर 3 बजे नेपाल के लिए रवाना हुए।
फेनी को भिंडी तो गेस्पा को आलू परवल भाया
प्रखर ने बताया कि गोरखपुर के प्रवास के दौरान दंपती को भारतीय भोजन कराया गया। इसके अंतर्गत फेनी को भिंडी की सब्जी, छांछ, दाल-चावल तो गेस्पा को आलू परवल, रायता और रोटी भोजन में पसंद आया। मीठे में मोती चूर का लड्डुु, पोहा खाने के साथ उसके बनाने की विधि भी फेनी ने सीखा है।
भारत के लोग करते हैं मेहमानों की इज्जत
प्रखर ने बताया की दंपती ने भारत की यात्रा के दौरान कई लोगों से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें यहां के लोगों का व्यवहार काफी मित्रवत मिला है। उन्होंने कहा कि यहां जैसे मेहमानों की इज्जत होती है। वैसी कहीं नहीं होती। पूरी दुनिया को भारत से मेहमाननवाजी का गुर सीखना चाहिए।