शिक्षिकाः सर बच्चे को लेकर पब्लिक ट्रांसपोर्ट से स्कूल जाना पड़ता है
मंत्रीः सभी सरकारी मुलाजिमों के साथ एक जैसा व्यवहार होगा। कोरोना महामारी अध्यापकों के लिए ही नहीं है कि केवल उन्हें बचाकर रखना है और बाकि सरकारी महिला मुलाजिमों को झोंक देना है। ये नहीं चलेगा। घर बैठे तनख्वाह नहीं मिलेगी। ये तरीका नहीं है।
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शिक्षिकाः मगर विद्यालय में कोई काम नहीं चल रहा है
मंत्रीः साल भर अगर विद्यालय नहीं चलेगा तो क्या आप घर बैठकर तनख्वाह लेंगे। ये सही नहीं है, घर रहना है तो लिखकर दे दिजिए तनख्वाह नहीं चाहिए। बाकि लोगों के बारे में सोचिए, जो अपनी जान जोखिम में डालकर डॉक्टर और एएनएम काम कर रहीं है। अगर वो विरोध करने लगेंगे तो क्या होगा। खुद भी शिक्षक रहा हूं। हमें कोई विशेषाधिकार तो नहीं है।
अमर उजाला इस ऑडियो की पुष्टि तो नहीं करता है, मगर सोशल मीडिया पर ही बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद द्विवेदी का एक और संदेश वायरल हो रहा है। जिसमें मंत्री ने सोशल मीडिया पर व्यक्तिगत बातचीत और संदेश को वायरल करने पर दुख जताया है।
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लिखा है कि शिक्षकों से अब फोन या व्हाट्सएप पर आने वाले संदेशों का वो जवाब नहीं देंगे। अब अगर किसी को बात करनी तो केवल पत्राचार से संवाद होगा। मंत्री बनने के बाद बिना किसी प्रोटोकॉल के मैंने शिक्षक साथियों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए थे। मगर शिक्षक साथियों के दुराग्रह की वजह अब इसे बंद कर रहा हूं।