भारत-नेपाल के बीच वर्ष 1959 में एक समझौता हुआ था। समझौता के इस परियोजना के अन्तर्गत गंडक नदी पर त्रिवेनी नहर हेड रेगुलेटर के नीचे बिहार के बाल्मीकि नगर मे बैराज बनाया गया। इसके बाद चार मई वर्ष 1964 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू ने नेपाल के राजा महेंद्र वीर विक्रम शाह की उपस्थिति में वाल्मीकि नगर बैराज का शिलान्यास किया गया। करीब पांच वर्षों तक चले निर्माण कार्य के बाद वाल्मीकि नगर का बैराज वर्ष 1969-70 बनकर तैयार हो गया। इसकी लम्बाई 747.37 मीटर और ऊँचाई 9.81 है। इस बैराज का आधा भाग नेपाल में है।
गंडक नदी हिमालय से निकलकर भारत में प्रवेश करती
गंडकी नदी नेपाल और बिहार में बहने वाली एक नदी है। जिसे बड़ी गंडक या केवल गंडक भी कहा जाता है। इस नदी को नेपाल में सालग्रामी और मैदानी इलाकों में नारायणी तथा सप्तगण्डकी नाम से भी पुकारते हैं। गंडक नदी हिमालय से निकलकर दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती हुई भारत में प्रवेश करती है। त्रिवेणी पर्वत के पहले इसमें एक सहायक नदी त्रिशूलगंगा मिलती है।
यह नदी काफी दूर तक उत्तर प्रदेश तथा बिहार राज्यों के बीच सीमा निर्धारित करती है। उत्तर प्रदेश में यह नदी महराजगंज और कुशीनगर जिलों से होकर बहती है। वही बिहार में यह चंपारन, सारन और मुजफ्फरपुर जिलों से होकर बहती है। यह नदी उद्गम स्थल से लगभग 1310 किलोमीटर की दूरी तय कर पटना के निकट गंगा नदी में समाहित हो जाती है। पटना के गांधी सेतु से गंगा-गंडक के मिलन को देखा जा सकता है।
इस परियोजना के अन्तर्गत गंडक नदी पर त्रिबेनी नहर हेड रेगुलेटर के नीचे बिहार के बाल्मीकि नगर मे बैराज बनाया गया। इसी बैराज से चार नहरें निकली हैं। जिसमें से दो नहरें भारत के बिहार व उत्तर प्रदेश राज्य तथा दो नहरें नेपाल राष्ट्र की तरफ जाती हैं। 256.68 किलोमीटर इस पूर्वी नहर से बिहार के चम्पारन, मुजफ्फरपुर और दरभंगा जिलों के 6.68 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई होती है। इसी नहर से नेपाल के परसा, बाड़ा, राउतहाट जिलों के 42 हजार हेक्टेयर भूमि का भी सिंचाई होती है। वही मुख्य पश्चिमी नहर से बिहार के सारन जिले की 4.84 लाख भूमि तथा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर जिलों के 3.44 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है।
सिंचाई के लिए नहरों का बिछा जाल
परियोजना के अंतर्गत गंडक नदी पर बैराज बनने की स्वीकृति मिलने के बाद तत्कालीन सांसद प्रो. शिब्बन लाल ने सरकार को नहर के लिए किसानों से जमीन दिलवाने की भी पहल की। इसके लिए वे हर गांव का भ्रमण किए। उसके बाद नहर निर्माण के लिए किसानों को उचित मुआवजा दिलाकर जमीन हस्तान्तरित कराई। जिससे नहर निर्माण पर काम शुरू हो सका। इससे नेपाल, बिहार तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में नहरों का जाल बिछ गया। वही सिंचाई की क्षमता 18800 क्यूसेक तक जा पहुंची। आज इसी परियोजना के कारण देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर व पश्चिमी चंपारण के इलाकों के खेत लहलहा रहे हैं।
बैराज निर्माण के बाद भारत को दी गई बड़ी जिम्मेदारी
दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत पश्चिमी मुख्य गंडक नहर और वाल्मीकि नगर बैराज का निर्माण नेपाल के भू-क्षेत्र से होना था। लेकिन भौगोलिक और तकनीकी कारणों से नेपाल राष्ट्र की जमीन लेना गंडक नहर प्रणाली के निर्माण के लिए ज्यादा उचित साबित नहीं हुआ। इसके बदले गंडक नदी के दायें तट पर नेपाल सीमा तक के भूभाग को बाढ़ और कटाव से बचाने की जिम्मेदारी भारत के समझौते में समावेशित कर दी गई। इसके तहत ‘ए गैप’ बांध की लम्बाई 2.5 कि.मी. तथा ‘बी गैप’ बांध की लम्बाई 7.23 कि.मी है। नेपाल बांध की लम्बाई 12 कि.मी और लिंक बाँध की लम्बाई 2.5 कि.मी है। जिसका निर्माण उत्तर प्रदेश सिंचाई और जल संसाधन विभाग खंड द्वितीय महाराजगंज ने कराया है।
बैराज में चार तरह के गेट के साथ लगा 56 सीसीटीवी कैमरा
गंडक बैराज वाल्मीकि नगर में कुल चार तरह के गेट लगे हैं। एक से छह तक लेफ्ट अंडर स्लुइस गेट हैं। सात से 24 तक स्पिलवे गेट हैं। 25 से 30 तक रिवर स्लुइस गेट हैं। वही 31 से 36 तक राइट अंडर स्लुइस गेट लगे हैं। जिसमें एक से छह तक तथा 25 से 30 तक के गेटों की डिजाइन एक है। इसका साइज 20 गुणा 60 फीट है। वही गेट संख्या सात से 24 तक की डिजाइन अलग है। इसमें 56 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।