माता-पिता की सरकारी नौकरी, घर पर सुविधा-संसाधनों की कोई कमी नहीं। मगर, खुद को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की ललक से शहर की एक बेटी चाय के स्टॉल से अपने करिअर में जोश भर रही है। कम लागत में ही आज ये बेटी, रोजाना 2500-3000 रुपये की आमदनी करने के साथ ही दो लोगों को रोजगार भी दे रही है।
दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के पंत पार्क के सामने ‘टीवर्स’ नाम के स्टॉल को चलाने वाली अवनी त्रिपाठी सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय में बीएससी द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं।
अवनी ने बताया कि 17-18 वर्ष तक इंटर की पढ़ाई, फिर स्नातक पूरा करने में 22-23 साल निकल जाते हैं। उसके बाद नौकरी के लिए भी दर-दर भटकना पड़ता है। 25 के बाद लड़की की शादी कर दी जाती है। ऐसे में वो अपने भविष्य के लिए ज्यादा कुछ कर नहीं पाती हैं। इसलिए, खुद को स्वावलंबी बनाने की पहल की है। खुशनसीब हूं की मेरे माता-पिता ने मेरा उत्साहवर्धन किया।
कूड़ाघाट के सिंघड़िया में रहने वाली अवनी ने बताया कि पहली कमाई लेकर जब घर गईं तो माता-पिता का मुुंह मीठा कराया। खूब आशीर्वाद मिला है। अवनी ने बताया कि 11 दिन पहले ही स्टॉल को लगाया है। रोजाना 200-250 चाय बिक जाती है। अकेले काम करने में थोड़ी परेशानी हो रही थी तो प्रीति और सूरज को अपने स्टार्टअप से जोड़ा। खुशी है कि अभी तक का प्रयास सफल रहा है। संवाद
चाय बना लेती हूं तो इसे ही चुना
चाय को स्टार्टअप के रूप में चुनने की वजह पूछने पर अवनी कहती हैं कि कम लागत में अच्छा मुनाफा होता है। चाय ऐसी चीज है जिसकी सुबह शाम या यूं कहे पूरे दिन किसी न किसी को जरूरत महसूस होती है। दूसरा (मुस्कुराते हुए) चाय के अलावा मुझे और कुछ बनाना भी नहीं आता है। अवनी ने कहा कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है। हमारी सोच ही किसी काम को छोटा या बड़ा बनाती है। अपने स्टार्टअप को ही अपना भविष्य बनाने की ठानी है।