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असुरन पोखरा मामला: साहब! जमीन पोखरे की थी तो खारिज दाखिल क्यों किया?

Sat, 23 Jan 2021 10:08 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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असुरन पोखरे के मामले में एसडीएम से मिलने पहुंचे लोगों ने किए कई सवाल - फोटो : अमर उजाला।
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के असुरन पोखरा मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल से मिलने पहुंचे लोगों ने कई ऐसे सवाल किए जिसका वाजिब जवाब उन्हें नहीं मिल पाया। लोगों का कहना था कि मामले में उनका कोई कसूर नहीं है फिर भी परेशान किया जा रहा है।
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लोगों ने एसडीएम से कहा कि उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराई। जब रजिस्ट्री कराई तो राजस्व दस्तावेज में जमीन काश्तकार के ही नाम दर्ज थी, न की पोखरे के नाम। इसके बाद सदर तहसील के तहसीलदार ने खारिज-दाखिल किया। अगर जमीन पोखरे की थी तो तत्कालीन तहसीलदार ने खारिज-दाखिल कैसे कर दिया? उन्होंने हम लोगों को आगाह क्यों नहीं किया? क्या तहसील प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं थी कि वह बताए कि जमीन सही नहीं है? यही नहीं, जीडीए ने मानचित्र स्वीकृत किया। कई सरकारी बैंकों ने लोन दिया। नगर निगम ने सड़क बनवाई। बिजली निगम ने कनेक्शन दिया। गृह कर, जल कर भी जमा करते हैं। क्या इतने विभागों में से किसी की भी जिम्मेदारी नहीं बनती है? हम लोगों को परेशान किया जा रहा है तो इन लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? होगी भी तो कब?

एसडीएम ने कॉलोनी के लोगों को बताया कि सभी पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कमिश्नरी को पत्र लिखा जा चुका है। हालांकि एसडीएम के आश्वासन पर कई कॉलोनी वालों की प्रतिक्रिया थी कि उन्हें मालूम है कि जैसे ताल सुमेर सागर के मामले में असली दोषियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, वैसे ही इस मामले में नहीं होगी।
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जमीन देने वाले ने दूसरी जमीन का वादा दोहराया

असुरन पोखरा मामले में 60 से अधिक कॉलोनी वालों ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल से मुलाकात की। इस दौरान जमीन देने वाले ऋषभ जैन के पुत्र भी मौजूद रहे। उन्होंने आश्वस्त किया कि तय समय पर जमीन उपलब्ध करा देंगे। एसडीएम ने 24 तक जमीन कहां है, यह बताने के साथ ही उसके कागजात दिखाने का निर्देश दिया है।

बता दें कि एसडीएम की तरफ से 29 जनवरी तक जमीन उपलब्ध कराने का मौका दिया गया है। ऋषभ जैन की तरफ से पीपीगंज में जमीन उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है।

साल 2010 में तत्कालीन कमिश्नर पीके महांति को दिए शपथपत्र के मुताबिक असुरन पोखरे की जमीन की कीमत के बराबर जमीन देने या उतनी कीमत देने की बात हुई थी। ऋषभ जैन ने जमीन देने का शपथपत्र दिया था।

वहीं, कमिश्नर ने जमीन न देने की दशा में पोखरे से कब्जा हटाने की चेतावनी दी थी। मगर न तो ऋषभ जैन ने जमीन दी और न ही कोई कार्रवाई हुई। उसी सहमति के अनुसार ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर ने पोखरे की जमीन मकान बनवाकर रह रहे लोगों को नोटिस देकर उसे खाली करने का निर्देश दिया था।

कार्रवाई के दबाव में आवंटियों ने जमीन बेचने वाले ऋषभ जैन पर दबाव बनाया तो उन्होंने जमीन देने के लिए हामी भर दी। एसडीएम ने 29 जनवरी तक का उन्हें मौका दिया था जमीन उपलब्ध कराने के लिए।
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