असुरन पोखरे के मामले में एसडीएम से मिलने पहुंचे लोगों ने किए कई सवाल
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के असुरन पोखरा मामले में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल से मिलने पहुंचे लोगों ने कई ऐसे सवाल किए जिसका वाजिब जवाब उन्हें नहीं मिल पाया। लोगों का कहना था कि मामले में उनका कोई कसूर नहीं है फिर भी परेशान किया जा रहा है।
लोगों ने एसडीएम से कहा कि उन्होंने जमीन की रजिस्ट्री कराई। जब रजिस्ट्री कराई तो राजस्व दस्तावेज में जमीन काश्तकार के ही नाम दर्ज थी, न की पोखरे के नाम। इसके बाद सदर तहसील के तहसीलदार ने खारिज-दाखिल किया। अगर जमीन पोखरे की थी तो तत्कालीन तहसीलदार ने खारिज-दाखिल कैसे कर दिया? उन्होंने हम लोगों को आगाह क्यों नहीं किया? क्या तहसील प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं थी कि वह बताए कि जमीन सही नहीं है? यही नहीं, जीडीए ने मानचित्र स्वीकृत किया। कई सरकारी बैंकों ने लोन दिया। नगर निगम ने सड़क बनवाई। बिजली निगम ने कनेक्शन दिया। गृह कर, जल कर भी जमा करते हैं। क्या इतने विभागों में से किसी की भी जिम्मेदारी नहीं बनती है? हम लोगों को परेशान किया जा रहा है तो इन लोगों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? होगी भी तो कब?
एसडीएम ने कॉलोनी के लोगों को बताया कि सभी पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। कमिश्नरी को पत्र लिखा जा चुका है। हालांकि एसडीएम के आश्वासन पर कई कॉलोनी वालों की प्रतिक्रिया थी कि उन्हें मालूम है कि जैसे ताल सुमेर सागर के मामले में असली दोषियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, वैसे ही इस मामले में नहीं होगी।