फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव : डुमरियागंज में रोमांचक होगा चुनावी मुकाबला

विज्ञापन
विज्ञापन
विधानसभा चुनाव : डुमरियागंज में रोमांचक होगा चुनावी मुकाबला
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। राजनीति के गढ़ डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र में पिछले चुनाव में केवल 171 वोटों के अंतर से जीत-हार का नतीजा तय हुआ था। इस बार भी चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों के बीच कड़ा मुकाबला देखा जा रहा है। सभी प्रमुख दलों के प्रत्याशी जोर लगाने के साथ मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।
डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से इस बार 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने पिछली बार के विजेता राघवेंद्र प्रताप सिंह को दोबारा टिकट दिया है। हिंदुत्व की राजनीति करने वाले राघवेंद्र प्रताप को योगी आदित्यनाथ का करीबी माना जाता है। इस सीट से वर्ष 2012 में भी उन्होंने चुनाव लड़ा था और हार गए थे। पार्टी ने वर्ष 2017 में फिर उन्हें टिकट दिया और 171 वोटों के अंतर से विजयी रहे।
विज्ञापन

सपा ने वर्ष 2012 और 2017 में बसपा के टिकट से चुनाव लड़ चुकी सैय्यदा खातून को प्रत्याशी बनाया है। मामूली अंतर से पिछले दो चुनाव हार चुकी सैय्यदा इस बार मुस्लिम और सपा के परंपरागत वोटों के सहारे पहली जीत की उम्मीद पाले हैं।
बसपा ने ब्राह्मण चेहरे अशोक तिवारी पर दांव लगाया है। बसपा की इस रणनीति के पीछे दलित और ब्राह्मण वोटों का गणित सेट करने के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने महिला प्रत्याशी कांति पांडेय को टिकट दिया है। महिला प्रत्याशी को मैदान में उतार कर कांग्रेस अपने परंपरागत वोटों के साथ आधी आबादी और ब्राह्मण वोटों को अपने पाले में लाने की रणनीति पर काम कर रही है। चार प्रमुख पार्टियों के बीच एआईएमआईएम ने इरफान मलिक को प्रत्याशी घोषित कर राजनीतिक लड़ाई को रोचक बनाने का प्रयास किया है। इरफान के पिता कमाल यूसुफ मलिक इस क्षेत्र से पांच बार विधायक रह चुके हैं। इस तरह मुस्लिम बाहुल्य सीट पर लड़ाई दिलचस्प हो गई है।
अन्य दलों में रिपब्लिकन बहुजन सेना के अब्दुल हन्नान चौधरी, आम आदमी पार्टी से काजी इमरान लतीफ, जनता दल यूनाइटेड से पवन कुमार, शिवसेना से शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव और बहुजन महापार्टी से शैलेंद्र कुमार चुनावी मैदान में है। इसके अलावा तीन निर्दलीय प्रत्याशी राजेश कुमार अग्रहरि, राम उग्रह और शिवकुमार भी चुनावी ताल ठोक रहे हैं।
नाराजगी और बगावत का भी पड़ सकता है असर
वर्ष 2012 और 2017 में सपा से चुनाव लड़ने वाले रामकुमार उर्फ चिंकू यादव का टिकट इस बार पार्टी ने काट दिया है। हालांकि उन्हें सपा के टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। पिछले चुनाव में वह तीसरे स्थान पर थे और पचास हजार से अधिक वोट हासिल किए थे। लेकिन पार्टी ने बसपा से सपा में शामिल हुई सैय्यदा खातून को प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी के निर्णय से चिंकू यादव के खेमे में नाराजगी देखने को मिल रही है। दूसरी ओर टिकट नहीं मिलने से नाराज भाजपा नेता शैलेंद्र उर्फ राजू श्रीवास्तव ने पाला बदलते हुए शिवसेना के टिकट से चुनावी मैदान में उतरे हैं।
सियासत की विरासत बचाने में जुटे हैं दो उम्मीदवार
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज विधानसभा क्षेत्र से इस बार दो प्रत्याशी, सपा की सैय्यदा खातून और एआईएमएआई के इरफान मलिक, सियासत की विरासत बचाने की जंग लड़ रहे हैं।
विज्ञापन

सैय्यदा खातून के पिता तौफीक अहमद इस सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। पिता की मृत्यु के बाद वर्ष 2010 में हुए उपचुनाव में उनकी मां खातून तौफीक बसपा के टिकट पर चुनाव जीतीं थीं। बसपा ने वर्ष 2012 और 2017 के चुनाव में सैय्यदा खातून को टिकट दिया, लेकिन वह सफल नहीं हुईं। इस बार सैय्यदा सपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। दूसरी ओर, एआईएमआई प्रत्याशी इरफान मलिक इस सीट से पांच बार विधायक रह चुके कमाल यूसुफ मलिक के पुत्र हैं। शारीरिक अस्वस्थता के चलते समाजवादी नेता रहे कमाल यूसुफ ने इस बार बेटे इरफान को चुनावी मैदान में उतारा है। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी में रहते हुए टिकट का गणित सेट नहीं हुआ तो इरफान मलिक ने एआईएमआईएम का दामन थाम लिया है। संवाद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें