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Gorakhpur: पुरखों के गांव पहुंचकर भर आईं अरुन लता की आंखें,129 साल पहले परनाना को अंग्रेज ले गए थे फिजी

Sun, 05 Mar 2023 08:16 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर

सार

 परिजनों से गले मिलते समय उनके चेहरे पर खुशी और आंखों में आंसू थे। वहीं, गांव वालों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और आरती उतारी।
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पुरखों के गांव पहुंचकर भर आईं अरुन लता की आंखें - फोटो : सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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कई सालों से भारत में अपने पूर्वजों के गांव को खोज रहीं फिजी निवासी अरुन लता शर्मा शनिवार को पति अनिल कुमार नारायन के साथ पैतृक गांव ददरी पहुंचीं तो रोने लगीं। एक तरफ करीब 129 साल पहले गांव तो क्या देश छोड़ चुके परनाना के गांव के मिलने की खुशी थी, तो दूसरी तरफ इतने सालों की यादें और विक्षोह था। पुश्तैनी जड़ों से मिलने से जहां वह निहाल थीं, वहीं खुशी का भी ठिकाना नहीं था। परिजनों से गले मिलते समय उनके चेहरे पर खुशी और आंखों में आंसू थे। वहीं, गांव वालों ने उनका फूल-मालाओं से स्वागत किया और आरती उतारी।

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करीब तीन घंटे ददरी गांव में रहकर अरुन लता शर्मा पति के साथ गोरखपुर शहर चलीं गईं। रविवार को वह पति अनिल कुमार के पैतृक गांव बिहार के सासाराम जनपद के पहलेजा गांव के लिए निकल जाएंगी। उन्होंने बताया कि पति के पैतृक गांव जाने से पहले वह गया जाएंगी। वहां पर पंडों के पास जाकर पति के पूर्वजों से संबंधित जानकारी हासिल करेंगी। पति के पैतृक गांव से लौटते समय फिर अपने पैतृक गांव आएंगी। बताया कि फिजी में उनका करीब 800 सदस्यों का परिवार है। पैतृक गांव का दर्शन कराने के लिए वह परिवार के अन्य सदस्यों को भी लेकर आएंगी।

अरुन लता ने बताया कि वह पति अनिल कुमार नारायन के साथ 24 दिनों से भारत में रहकर पूर्वजों का गांव खोज रही हैं। शनिवार की शाम बड़हलगंज थाना क्षेत्र के ददरी गांव पहुंचने पर उनकी तलाश पूरी हुई। उन्होंने अपने पूर्वजों के बारे में जो प्रमाणपत्र दिए गांव के बुजुर्गों ने उस पर अपनी सहमति जताई। इस तरह उनकी कई पीढि़यों से बिछड़ा परिवार मिल गया। 

स्व अनिरुद्ध शाही की तस्वीर देखकर रोने लगीं
ददरी गांव पहुंचते ही अरुन लता गुरुकुल पीजी कॉलेज पर लगी पूर्व संस्थापक स्व अनिरुद्ध शाही की तस्वीर देखकर रोने लगीं। लोगों के पूछने पर बताया कि इनकी तस्वीर मेरे परनाना रामगरीब शाह की तरह है। इसके बाद लोगों ने उन्हें पूर्व ब्लॉक प्रमुख बड़हलगंज व गुरुकुल पीजी कॉलेज के संस्थापक स्व. अनिरुद्ध शाही के घर भेजा। यहां प्रबंधक जयप्रकाश शाही सहित पूरे परिवार से मिलकर वह भाव विभोर हो गईं।

 

साल 1894 में अरुन लता के पूर्वज गए थे फिजी
अरुन लता के गगहा के पूरे गांव निवासी परनाना रामगरीब शाह को मजदूरी कराने के लिए अंग्रेज साल 1894 में जहाज से फिजी ले गए थे। बताया जाता है कि उस दौरान अंग्रेज भारत से 60 हजार लोगों को मजदूरी कराने के लिए फिजी ले गए थे। इनमें से करीब 45 हजार लोग किसी तरह भारत वापस आ गए, लेकिन बाकी के लोग फिजी में बस गए।

आस्ट्रेलिया की लाइब्रेरी में मिली परनाना की लिखी किताब
अरुन लता को आस्ट्रेलिया की नेशनल लाइब्रेरी में दस्तावेजों से मिलान करने पर अपने परनाना रामगरीब शाह की लिखी किताब फैमिली ट्री मिली। इसी से जानकारी हासिल करके वह अपने पूर्वजों का पैतृक गांव खोजने लगीं। इसी जानकारी के आधार पर वह गगहा विकास खंड के पूरे गांव पहुंचीं। यहां पता करने पर मालूम चला कि उनके वंशज बड़हलगंज विकास खंड के ददरी गांव जाकर बस गए हैं। इसके बाद वह अपने वंशज ददरी गांव के गुरुकुल पीजी कॉलेज के प्रबंधक जयप्रकाश शाही के घर पहुंचीं। अरुन लता को उनका पैतृक गांव खोजने में पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन ने काफी मदद की है।
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बीस साल से खोज रहीं हैं पूर्वजों का गांव
करीब 61 वर्षीय अरुन लता शर्मा आस्ट्रेलिया में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं। वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हो गईं। पति अनिल कुमार नारायन आस्ट्रेलिया के एक विश्वविद्यालय में विज्ञान के लेक्चरर थे। जब अरुन लता को यह जानकारी हुई कि उनके परनाना भारत के गोरखपुर जिले के रहने वाले थे, तो मन में पूर्वजों का गांव देखने की इच्छा हुई। बताया कि वह 20 साल से पूर्वजों के परिवार का पता खोज रही हैं।

कोरोना महामारी की वजह से लौटना पड़ा था
अरुन लता ने बताया कि वह वर्ष 2019 में छह माह का वीजा लेकर दिल्ली आईं थीं, लेकिन कोरोना महामारी की वजह से फिजी लौट गईं। इस वर्ष 11 फरवरी को आस्ट्रेलिया से दिल्ली पहुंचीं। इसके बाद पूर्वजों का गांव खोजने हरियाणा गईं, लेकिन कामयाबी नहीं मिलीं। इसके बाद वाराणसी गईं, मगर वहां भी कुछ पता नहीं चला। इतना जरूर ज्ञात हुआ कि ऐसा गांव गोरखपुर में है। इसके बाद वह गोरखपुर आ गईं। एक होटल में रुकने के बाद पर्यटन विभाग से संपर्क किया। इसके बाद राजस्व विभाग गईं। परनाना का नाम बताकर भूअभिलेख खोजा। यहां पर मालूम हुआ कि इस नाम का आदमी गगहा के पूरे गांव में रहता था। फिर वह पूरे गांव पहुंच गईं। पूरे गांव में कई लोगों से मिलने के बाद पता चला कि उनके वंशज ददरी गांव में बस गए हैं।
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