मदनमोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय के सिविल विभागाध्यक्ष व परिवहन एक्सपर्ट प्रो एके मिश्रा ने बताया कि शहर में ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बेहद खराब है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों पर शहर के 24 स्थान खरे नहीं उतर रहे हैं। आईआईटी बीएचयू की टीम ने मेरे निर्देशन में एक सर्वे किया है। इस सर्वे में जो प्रारंभिक जानकारी मिली हैं वह बेहद खतरनाक हैं। शहर के 24 प्रमुख स्थानों और चौराहों पर ध्वनि प्रदूषण की जांच एसएलएम (साउंड लेवल मीटर) और कंपन्न प्रदूषण की जांच एक्सएलओ (गाड़ी और सड़क के बीच के कंपन्न) मशीन से की गई। इन स्थानों पर 30 से 35 डेसीबल ध्वनि अधिक मिली है। कंपन्न की स्थिति भी बेहद खराब है। इस वजह से भविष्य में इन इलाकों में बनीं इमारतें कमजोर हो जाएंगी। भूकंप के हल्के झटके आने पर ऐसी इमारतों के गिरने का खतरा रहता है।
मंदिर और अस्पताल वाले इलाके आते हैं साइलेंट जोन में
प्रो एके मिश्र ने बताया कि मंदिर और अस्पतालों वाले स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण की स्थिति बहुत खराब है, जबकि यह स्थान साइलेंट जोन में आते हैं। ऐसे स्थानों पर ध्वनि 50 डेसीबल होनी चाहिए, जबकि बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एम्स, बेतियाहाता और आरोग्य मंदिर के आसपास के इलाकों में 80 से 85 डेसीबल ध्वनि है, जोकि प्रदूषण की श्रेणी में आती है।
विभिन्न इलाकों में ध्वनि के मानक
| क्षेत्र |
दिन में मानक |
रात में मानक |
| औद्योगिक |
75 डेसीबल |
70 डेसीबल |
| कॉमर्शियल |
65 डेसीबल |
55 डेसीबल |
| रिहाइशी |
55 डेसीबल |
45 डेसीबल |
| साइलेंट जोन |
50 डेसीबल |
40 डेसीबल |
नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ डॉ. आदित्य पाठक बताते हैं कि लोग ध्वनि प्रदूषण के मामले को नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि ध्वनि प्रदूषण से न केवल आवाज जा सकती है, बल्कि याददाश्त एवं एकाग्रता में कमी आ जाती है। यही नहीं, चिड़चिड़ापन, अवसाद, नपुंसकता और कैंसर जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं। कई बार रात को सोते समय कान में सीटी बजने की आवाज और एकांत में बैठने पर कानों में सनसनाहट की आवाज सुनाई देने की वजह भी ध्वनि प्रदूषण ही है।
शहर के प्रमुख स्थानों पर ध्वनि प्रदूषण की स्थिति
| गीडा औद्योगिक क्षेत्र |
82.3 डेसीबल |
| गोलघर |
82.5 डेसीबल |
| बेतियाहाता |
83.6 डेसीबल |
| गणेश चौक |
85.2 डेसीबल |
| गोरखनाथ मंदिर |
85.1 डेसीबल |
| एम्स |
84.5 डेसीबल |
| मेडिकल कॉलेज |
78.9 डेसीबल |
| मोहद्दीपुर |
82.6 डेसीबल |
| असुरन |
86.1 डेसीबल |
| आरोग्य मंदिर |
80.2 डेसीबल |
यह करने से बचें
ईयरफोन का इस्तेमाल कम करें। म्यूजिक प्लेयर पर 60 डेसीबल आवाज दिन भर में 60 मिनट से ज्यादा न सुनें। फोन में स्मार्ट वॉल्यूम की सुविधा है तो उपयोग करें।