2020 में अर्पित ने गांव में ही पहला अपराध किया। सिर्फ तू-तू, मैं-मैं होने पर उसने गांव के रमारंजन शुक्ला पर प्राणघातक हमला कर दिया था। घरवालों को जब यह बात पता चली तो अर्पित के पिता सत्यशील शुक्ला और चाचा सत्यजीत शुक्ला उसके समर्थन में आ गए और फिर घर में घुसकर मारपीट की गई। इस मामले में पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की कोशिश की धारा में केस दर्ज किया गया। इसके अलावा एक मुकदमा अर्पित पर गगहा थाने में भी दर्ज है।
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गांव में आए दिन किसी को भी थप्पड़ मार देता था अर्पित
गांव वालों ने बताया कि अर्पित आए दिन गांव में किसी को भी थप्पड़ मार दिया करता था। उसे गांव वाले मनबढ़ मान लिए थे और एक थप्पड़ की शिकायत कौन करने जाए, यह सोचकर उससे दूरी बनाकर ही रहते थे। आज भी गांव में उसका इतना खौफ है कि उसके उम्र के बच्चे उसके सामने कुछ भी बोलने से बचते हैं। गांववाले भी खुलकर कुछ नहीं बोलना चाहते।
शनिवार की रात मुठभेड़ में घायल अर्पित के साथी आजमगढ़ के आकाश को पुलिस ने सोमवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेजा गया। दरअसल, शनिवार रात में रामगढ़ताल इलाके में वह अर्पित के साथ बाइक से जा रहा था। इस दौरान पुलिस मुठभेड़ में आकाश के पैर में गोली लग गई थी और उसे मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद सोमवार को पुलिस ने आकाश को जेल भिजवा दिया।
एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने कहा कि फरार आरोपियों की तलाश में पुलिस टीमें लगी हैं। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर ली जाएगी।
समाजशास्त्री दीपेन्द्र मोहन सिंह ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के पीछे बुनियादी समाजीकरण का अभाव है। किशोरावस्था में व्यक्तित्व के निर्माण तथा व्यवहार के निर्धारण में पारिवारिक एवं सामाजिक वातावरण का प्रमुख योगदान होता है। समकालीन समाज में माता-पिता के आपसी संघर्ष, भावनात्मक उपेक्षा, उपभोक्ता संस्कृति और संचार माध्यमों आदि के कारण किशोरों के व्यवहार में विकृतियां दिखाई दे रहीं हैं। सरकार, समाज, अभिभावक के रूप में हम सभी का नैतिक कर्तव्य है कि हम भावी पीढ़ी के सर्वांगीण विकास के लिए उन्हें सकारात्मक सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण प्रदान करें।