सवाल ( शिखा सिंह) : पीसीएस और आईएएस की तैयारी में प्री या मेन किसको ज्यादा तवज्जो दें?
जवाब (अर्पित) : देखिए, मेन की तैयारी में पाठ्यक्रम पता होता है। सामान्य अध्ययन भी डिटेल में है। जब पढ़ेंगे तो पता चलेगा कि आपको क्या-क्या पढ़ना है। करीब आठ से नौ महीने तैयारी में लगेंगे। प्री की तैयारी चार महीने पहले से शुरू कर दें।
सवाल ( विशाल सिंह) : करंट अफेयर की तैयारी में क्या-क्या ख्याल रखना जरूरी है?
जवाब ( अर्पित) : अखबार जरूर पढ़ें, इससे तात्कालिक मुद्दों की अच्छी जानकारी हो जाती है। पत्रिका में सारे मुद्दे कवर नहीं होते हैं। अब यूपीएससी के पाठ्यक्रम में भी बदलाव आया है। अगर नियमित अखबार पढ़ते हैं तो मदद मिलेगी। अब आपके ऊपर है कि सूचनाओं को कितना फिल्टर कर लेते हैं।
सवाल ( क्षमा त्रिपाठी) : परीक्षा के लिए टाइम टेबल कितना जरूरी है, आपने कैसे तैयारी की?
जवाब ( अर्पित) : मेरा मानना है कि बहुत ज्यादा अनुशासन भी जरूरी नहीं है। बस प्लानिंग अच्छी होनी चाहिए। छह महीने की माइक्रो प्लानिंग बनाएं। मैं, तो सुबह नौ बजे सोकर उठता था। लेकिन, जितना समय पढ़ाई का तय था, उससे समझौता नहीं किया। प्लान को रोजाना फॉलो करें। सोने के पहले एक बार जरूर सोचें कि आप अपनी दिन भर की पढ़ाई से कितना संतुष्ट हैं। एक दिन में सात से आठ घंटे की पढ़ाई जरूरी होती है।
सवाल ( रेनू) : इंटरव्यू के लिए खुद कैसे तैयार करना चाहिए?
जवाब ( अर्पित) : आत्मविश्वास होना बेहद जरूरी है। अगर कोई सवाल ऐसा पूछा जाता है, जिसका जवाब आपकोे पता नहीं है, तो सीधे कह दें कि नहीं जानता हूं। सामने वाले को इससे आपके आत्मविश्वास का पता चलेगा। एक सवाल का जवाब मैं, भी नहीं जानता था। लिहाजा, इंटरव्यू में कहा दिया कि मैं, नहीं जानता हूं। अगर आपने आत्मविश्वास खोया तो निगेटिव मार्किंग शुरू हो जाती है।
सवाल ( सौम्या उपाध्याय) : तैयारी में सोशल मीडिया व इंटरनेट बाधा है क्या, दूरी बनानी चाहिए?
जवाब ( अर्पित) : समाज से कभी भी खुद को अलग नहीं रखना चाहिए। सोशल मीडिया के लिए कम समय दें। मैं तो तैयारी के दौरान इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप से जुड़ा रहा। लेकिन, एक निश्चित समय ही देता था। प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम को सुनना चाहिए। प्रधानमंत्री कई बार ऐसे इश्यू पर चर्चा करते हैं, जिसकी जानकारी बहुत जरूरी होती है।
सवाल (आयुषी राव) : तैयारी का स्लॉट कैसे बनाएं? अगर टारगेट पूरा न होने पाए तो क्या करें?
जवाब ( अर्पित ) : महीने में दो दिन इसके लिए निकालें। आपको निर्णय लेना है कि छूटे स्लॉट को कैसे पूरा करें। पाठ्यक्रम को छोड़ना नहीं चाहिए, वरना आदत में शुमार हो जाएगा। जो आपकी तैयारी के लिए नुकसानदायक होगा।
सवाल ( आलोक गुप्ता) : जब तैयारी के दौरान उलझन बढ़ जाए तो क्या करना चाहिए ?
जवाब ( अर्पित) : ‘दिल ना-उम्मीद तो नहीं नाकाम ही तो है, लंबी है गम की शाम मगर शाम तो ही है।’ मशहूर शायर फैज अहमद की यह शायरी अक्सर मैं गुनगुना लेता था, इससे बहुत ज्यादा रिलैक्स महसूस करता था। आज भी इस शायरी को गाता हूं, सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसी तरह कोई भी गीत, संगीत या जो आपको पसंद हो, उस पर ध्यान फोकस कर लें, रिलैक्स हो जाएंगे। मन खुश होने पर जो पढ़ेंगे, उसे सौ फीसदी ग्रहण करेंगे।