हमारी आंख में किसी वस्तु का प्रतिबिंब बनने में दस सेकेंड लगते हैं। इससे तेजी से देखने वाली वस्तु बदल जाए तो हम जो भी देखेंगे, उसमें भ्रम उत्पन्न होता है। इसे प्रयोग से दिखाने वाले उपकरण लगेंगे ताकि लोग इसे खुद महसूस कर सकें। वहीं गुरुत्वाकर्षण और इसके विपरीत बल के प्रयोग पर आधारित उपकरण भी लगेंगे।
इसके अलावा फ्लोटिंग बॉल, सी बैक सायरन, मॉडल ऑप्टिक्स, ध्वनि, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक, स्टेटिक इलेक्ट्रिसिटी, इलेक्ट्रानिक्स, मिरर, ऑप्टिकल इल्यूशन आदि के बारे में प्रयोग से समझाने वाले तमाम उपकरण लगेंगे। महान भारतीय वैज्ञानिकों के स्टैच्यू के अलावा भारत द्वारा अंतरिक्ष में भेजे गए राकेट आदि की भी आकृतियां स्थापित की जाएंगी।
क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने कहा कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्किोण विकसित करने के नजरिए से प्रदेश के दूसरे साइंस पार्क को गोरख