गोरखपुर के रामगढ़ताल में मछली के ठेके लिए ढाई साल पहले जहां 22 करोड़ रुपये तक की बोली लगी थी, वहीं आज कोई आवेदन करने वाला नहीं मिल रहा है। गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) तीन बार नीलामी का आवेदन निकाला, लेकिन कोई आवेदन ही नहीं कर रहा है। समितियों का कहना है कि नीलामी की न्यूनतम बोली बहुत अधिक है।
रामगढ़ताल में मछली पकड़ने का ठेका एक अप्रैल 2019 को मत्स्यजीवी सहकारी समिति लिमिटेड रामगढ़ ताल उर्फ महेरवा की बारी, कूड़ाघाट को मिला था। 22 करोड़ 79 लाख रुपये में समिति को 28 जून 2024 तक मछली पकड़ने का अधिकार मिला था। समिति ने पांच करोड़ 19 लाख 69 हजार रुपये ही जमा कराया। इसके बाद रकम जमा नहीं की गई।
समिति का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से बाकी रकम नहीं जमा की जा सकी। करीब 14 करोड़ रुपये के बकाये में संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर जीडीए ने इस समिति का अनुबंध रद कर दिया है। अगस्त 2021 में अनुबंध रद होने के बाद प्राधिकरण तीन बार टेंडर निकाल चुका है। दो बार कोई आया ही नहीं तो तीसरी बार भी टेंडर निकले काफी समय हो गया मगर अभी तक कोई आवेदन नहीं आया।
जीडीए के उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने बताया कि रामगढ़ताल में मछली के आखेट के लिए आवेदन निकाला गया है। दो बार कोई समिति आगे नहीं आई। तीसरी बार आवेदन निकाला गया है। उम्मीद है कि इस बार नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। पुरानी समिति पर करोड़ों का बकाया है। अनुबंध रद होने के बाद उसके खिलाफ आरसी की कार्रवाई की जा रही है।