बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. महिम मित्तल ने बताया कि एंटीबायोटिक का सही सेवन न करने से ऐंटीबायोटिक रेसिस्टेंट ऑर्गेज्मस विकसित हो जाते हैं, जिसके कारण संक्रमण जल्दी ठीक नहीं हो पाता है और गंभीर रूप ले लेता है।
बताया कि अगर कोई भी मरीज लगातार दो से तीन माह तक दर्द और एंटीबायोटिक दवा का इस्तेमाल खुद करता है तो वह किडनी संक्रमण से लेकर ब्लड प्रेशर, अल्सर, हाइपरटेंशन, दमा की बीमारी का शिकार हो सकता है। ऐसे मरीज बीआरडी में आ रहे हैं। यह समस्या कोरोना महामारी के बाद तेजी से बढ़ी है। बताया कि एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरिया को मारता है। एंटीबायोटिक खाने से वायरस कभी नहीं मरते।
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माइक्रोबायोलाॅजी विभाग करेगा जागरूक
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलाॅजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि हर दिन चार से पांच जांच में इस बात की पुष्टि हो रही है कि मरीज ज्यादा एंटीबायोटिक और दर्द की दवाओं के इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी वजह से उनकी किडनी और आंतों पर बुरा असर पड़ रहा है। इसे लेकर डॉक्टरों को भी जागरूक किया जाएगा। सलाह दी जाएगी कि वह बहुत जरूरी हो तभी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करें।
सहजनवां के रहने वाले एक युवक को शरीर में दर्द और बुखार की शिकायत थी। दर्द और बुखार होने पर मेडिकल स्टोर से बुखार और हाई एंटीबायोटिक दवाएं खा लेता था। इस बीच उसके आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी। परिजन नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास ले गए। जहां पर डॉक्टरों ने जांच कर उसका इलाज शुरू किया। जांच के दौरान पता चला कि उसके एक किडनी में दिक्कत बढ़ गई है और आंत में संक्रमण की वजह से अल्सरेटिव कोलाइटिस हो गया। बीआरडी के डॉक्टरों ने जांच शुरू की तो पता चला कि हाई एंटीबायोटिक और दर्द की दवा ने यह दोनों बीमारी हुई हैं।
केस-दो
पिपराइच के रहने वाले एक युवक को पेट दर्द की शिकायत थी। स्थानीय स्तर पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खा लेता था। दवा खाने के बाद राहत मिल जाती थी। इस बीच पेट दर्द फिर से शुरू हुआ। परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विभाग के गेस्ट्रोइंटालॉजी विभाग पहुंचे, जहां पर जांच की गई तो पता चला कि हाई एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से क्रोहन रोग (आंतों में सूजन) और किडनी में संक्रमण की पुष्टि हुई। स्थिति अब ऐसी हो गई है कि आंत और किडनी संक्रमित हो चुके हैं। डॉक्टरों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया है।