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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना की हुई शुरुआत, खुद केस दर्ज करेंगे विवेचना

Sun, 25 Oct 2020 05:26 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
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मानव तस्करी सहित अन्य मामलों में अब गोरखपुर की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग थाना खुद एफआईआर दर्ज करेगा और विवेचना भी करेगी। गोरखपुर में थाने की शुरुआत कर दी गई है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने पुलिस लाइन स्थित पुलिस अस्पताल के पास भवन को स्वरूप दे दिया है।

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चार साल पहले गोरखपुर को एचटीयू थाने का आदेश जारी किया गया था। अब इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है। इसी के साथ एंटी ट्रैफिकिंग यूनिट थाने के रूप में अस्तित्व में आ जाएगी। इसके लिए पैसा भी जारी कर दिया गया है। अभी तक एचटीयू के किसी भी कार्रवाई में कैंट थाने में ही एफआईआर दर्ज होती है।

जानकारी के मुताबिक, 2016 में प्रदेश के 23 जिलों में मानव तस्करी की रोकथाम के लिए एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को थाने का दर्जा दे दिया गया था। इनमें मुजफ्फरनगर, कुशीनगर, बाराबंकी, खीरी, बहराइच, बलरामपुर, बदायूं, सिद्धार्थनगर, उन्नाव, हरदोई, श्रावस्ती, मऊ, कानपुर नगर, गोरखपुर, बिजनौर, जौनपुर, आजमगढ़, फिरोजाबाद, पीलीभीत, सीतापुर, बलिया, बागपत नगर एवं शाहजहांपुर शामिल किए गए थे।
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तब पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि इन यूनिट पर मानव तस्करी से जुड़े क्राइम की एफआईआर, उनकी विवेचना और आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसका कार्यक्षेत्र पूरा जिला होगा। तभी से थाने के लिए भूमि की तलाश शुरू हो गई थी। लेकिन चार साल बाद भी बिल्डिंग का निर्माण नहीं हो सका। इसलिए जैसे-तैसे यूनिट चल रही है। चार साल बाद इन सभी 23 थानों का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। थाना निर्माण के लिए रकम भी जारी कर दी गई है। हालांकि भवन निर्माण के लिए अभी जमीन फाइनल नहीं हो पाया है।

कैंट में दर्ज कराते थे अपनी एफआईआर
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट अभी तक कभी भी कोई कार्रवाई करती है तो कैंट थाने में उसकी एफआईआर दर्ज कराती है। मुकदमा दर्ज होने के बाद थाना की पुलिस विवेचना करती है। हालांकि अब कुछ मामलों को एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट में ट्रांसफर किया जाने लगा है।

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