गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज माफिया एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं। शनिवार को बिहार से आई किशोरी के भर्ती होने से पहले ही बिचौलिए परिजनों को बरगलाने लगे। वे उसे निजी अस्पताल ले जाने की कोशिश में जुटे थे। संदिग्ध गतिविधि देख गार्डों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने बिचौलियों की एंबुलेंस को सीज कर दिया। इस दौरान बिचौलिए और एंबुलेंस चालक भाग गए।
जानकारी के अनुसार, बिहार की 14 वर्षीय किशोरी को गंभीर हालत में भर्ती करने के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लाया गया था। भर्ती किए बिना ही बिचौलिए परिजनों को निजी अस्पताल ले जाने के लिए बहलाने-फुसलाने लगे। इसे देखकर गार्डों ने तुरंत मेडिकल चौकी पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए श्री वेदना मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल नामक पंजीकृत एंबुलेंस को सीज कर दिया।
इसी तरह बृहस्पतिवार को भी एक और मामला सामने आया था। बिहार के गोपालगंज जिले के किशुनपुरा की निप्पू कुमारी गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती थी। आरोप है कि चिलुआताल क्षेत्र के एक निजी अस्पताल से जुड़ी एंबुलेंस मरीज को अपने अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रही थी, जिसे गार्डों ने पकड़ा और पुलिस के हवाले कर दिया।
पुलिस की जांच में पता चला कि एंबुलेंस मनोकामना अस्पताल के नाम से पंजीकृत थी। पूछताछ में यह सामने आया कि एंबुलेंस चालक मरीज के परिजनों को बरगलाकर अपने अस्पताल में भर्ती कराने ले जा रहा था। हैरानी की बात यह रही कि परिजनों को जिस अस्पताल में भर्ती कराया जा रहा था, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी।
मामला संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने एंबुलेंस को सीज कर दिया। एंबुलेंस सीज होने से नाराज मैनेजर ने बहस भी की लेकिन पुलिस ने उसे सख्त चेतावनी दी और मेडिकल कॉलेज परिसर के आसपास दोबारा न दिखने की हिदायत देकर छोड़ दिया। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि एंबुलेंस सीज कर मामले की जांच की जा रही है।