बीच की सीट पर बैठी महिलाएं होती हैं परेशान।
- फोटो : अमर उजाला।
दो मिनट के बाद एक युवती पीछे की सीट पर सवार हुई, लेकिन माहौल भांपकर, देरी होने का हवाला देकर वह उतर गई। इसके बाद एक महिला आईं। वह बैठीं तो उनके बगल में 40 साल के एक व्यक्ति सवार हुए। उन्होंने अपना मोबाइल फोन निकाला और पूरी सीट पर फैल गए। दो लोगों को आगे बैठाकर ऑटो चालक ने गाड़ी बढ़ा दी। यूनिवर्सिटी चौराहे पर ऑटो पहुंचा तो उसमें दो अन्य महिलाएं भी चढ़ी। इसके बाद जगह कम पड़ने लगी। पीछे की सीट कुल चार लोग हो गए। इसके बाद भी वह अपनी जगह से टस मस नहीं हुए। वहां से चलकर ऑटो मोहद्दीपुर पहुंचा।
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लाल बत्ती पार कर चालक ने चौराहे होटल के सामने पर यात्रियों की तलाश की। फिर आगे बढ़ लिया। 01.5 बजे ऑटो नंदानगर अंडरपास से गुजरते हुए पुलिस चौकी के सामने पहुंचा। यहां एक महिला और एक पुरुष सवार हुए। इसके बाद चालक सहित आगे तीन लोग, बीच और पीछे की सीट पर चार-चार लोग हो गए। पुलिस चौकी से आगे बढ़ते ही चालक ने साउंड की आवाज बढ़ाई तो ऑटो का स्पीडो मीटर 40 से उलछकर 60 पहुंच गया। इस बीच वह मोबाइल फोन पर व्हाट्सएप मैसेज भी चेक करता रहा।
एयरपोर्ट के सामने ब्रेकर पर ऑटो वाले ने जोर ब्रेक दबाया तो यात्री उछल पड़े। इसका फायदा उठाकर पीछे बैठे यात्री ने एक महिला के कोहनी सटा दी। महिला थोड़ी असहज हुई। लेकिन फिर जंगल शुरू हो गया। इसके बाद फिर से ऑटो अपनी रफ्तार में आ गया। 01.21 बजे चालक ने ऑटो को कुसम्हीं बाजार तिराहे पर पहुंचा दिया।
जंगल कुसम्ही रोड पर ऑटो में ओवरलोड बैठी सवारी।
- फोटो : अमर उजाला।
शहर में चलने वाले ऑटो में मनमानी तरीके से यात्रियों को बैठाया जाता है। बीच वाली सीट जबरन लगाकर ऑटो चालक लोगों को बैठाते हैं। इससे आमने-सामने बैठने वाले यात्रियों के पैर आपस में टकराते हैं। कम जगह का बेजा फायदा उठाकर मनचले आए दिन महिला यात्रियों संग बदसलूकी करते हैं। लेकिन इसकी शिकायत सामने नहीं आ पाती है। मजबूर छात्राएं और महिलाएं चुपचाप सफर कर लेती हैं।
नशे में चलाते हैं ऑटो
नगर में बस सेवा का संचालन किया जा रहा है। इसके बाद भी लोगों को ऑटो से यात्रा करनी पड़ती है। ऑटो चलाने वाले चालकों के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं होती। क्योंकि किसी पास कोई परिचय पत्र नहीं होता है। इस वजह से ऑटो चालक भी खूब मनमानी करते हैं। दोपहर 12.18 बजे शास्त्री चौराहे पर सहजनवां की ओर जाने वाले ऑटो खड़े थे। बूंदाबांदी होने की वजह से कम यात्री थे।
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एक ऑटो में बैठे दो चालक सिगरेट को खाली करके उसमें कोई मसाला भर रहे थे। उनके अंदाज से ऐसा लगा जैसे वह सिगरेट में कोई दूसरी नशीली वस्तु मिलाकर पीने की तैयारी कर रहे हैं। यात्रियों की मानें तो अधिकांश ऑटो चालक नशे के आदी हैं। ऐसे चालकों के ऑटो में सवार होने पर भी महिलाओं को असहजता होती है।
ऑटो चालकों के पास नहीं कोई परिचय पत्र
शहर में चलने वाले ऑटो चालकों की पहचान करने के लिए उनका परिचय पत्र और वर्दी पहनने की योजना पांच साल पूर्व लागू हुई थी। वर्ष 2018 में तत्कालीन एसपी यातायात आदित्य प्रकाश वर्मा ने ऑटो चालकों का परिचय पत्र जारी करने की योजना लागू की थी।
चालकों का नाम, पता, मोबाइल नंबर और ब्लड ग्रुप लेकर जांच कराई गई। इसका ब्यौरा तैयार कराकर पुलिस जांच हुई, ताकि आपराधिक छवि के चालकों की पहचान हो सके। हालांकि उनके तबादले के बाद योजना बंद हो गई।
मोहद्दीपुर रोड पर ऑटो में ओवरलोड बैठी सवारी।
- फोटो : अमर उजाला।
- सवारी ढोने वाले प्रत्येक वाहन चालक की वर्दी होनी चाहिए। उसके पास परिचय पत्र हो।
- वाहनों की नंबर प्लेट दुरुस्त हो। वह दूर से साफ-साफ नजर आए।
- सभी ऑटो चालक मानक के अनुसार ही सवारी बैठाएं।
- ऑटो पर संचालन का रूट और किराया भी अंकित होना चाहिए।
- वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
- वाहन में गाना बजाने पर भी रोक है।
एसपी ट्रैफिक डॉ. एमपी सिंह ने कहा कि समय-समय पर जांच की जाती हैै। ऑटो में साउंड सिस्टम से गाने बजाना गलत है। ऑटो या अन्य किसी वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्री नहीं बैठाए जाने चाहिए। बीच वाली सीट पर सवारी बैठाने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।