26 अप्रैल को देश के विभिन्न राज्यों से आईं आयकर की कुल सात टीमों ने गैलेंट ग्रुप, बिल्डर शोभित मोहन दास और उनके करीबियों के यहां गहन छानबीन की। सूत्रों के मुताबिक, टीम ने यह भी पड़ताल की है कि गैलेंट ग्रुप ने कब-कब, कहां-कहां से स्क्रैप मंगाया है और उससे कितना प्रोडक्शन किया जाता है। इसी आधार पर फर्म की कमाई का अनुमानित आय का रिकॉर्ड खंगाला गया।
सूत्र बताते हैं, शनिवार को टीम एक स्क्रैप व्यापारी के तलाश में थी। इसी बीच राजेंद्र नगर के एक स्क्रैप व्यापारी का पता मिला। टीम राजेंद्रनगर गई, लेकिन व्यापारी नहीं मिले। व्यापारी के बेटे को आयकर की टीम अपने साथ लेते आई। हालांकि, तीन घंटे बाद पिता के आने पर बेटे को टीम ने जाने दिया। पिता से स्क्रैप के संबंध में पूरी जानकारी लेने के बाद टीम ने उन्हें भी वापस भेज दिया।
शेल कंपनियों से 100 करोड़ से ऊपर के लेन-देन पर मुकदमा
आयकर विभाग के एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि जांच के समय किसी भी फर्म की तरफ से शेल कंपनियों (फर्जी) द्वारा 100 करोड़ रुपये से ऊपर के लेन-देन का रिकाॅर्ड आता है, तो आयकर विभाग संबंधित पर मुकदमा दर्ज कर लेती है। इसकी सूचना प्रवर्तन दल को दी जाती है। शेल कंपनियों के द्वारा वित्तीय लेन-देन फाइनेंशियल फ्रॉड की श्रेणी में आता है। ऐसे में इन कंपनियों के माध्यम से वित्तीय लेनदेन को मनी लांड्रिंग में रख लिया जाता। इसमें जांच के दायरे में व्यक्ति की गिरफ्तारी तक की जाती है।
छापे के दौरान भी होता रहा सरिया का उत्पादन
गोरखपुर। छापे की कार्रवाई के दौरान गैलेंट ग्रुप में सरिया का उत्पादन चारों दिन चलता रहा। सिर्फ गाड़ियों के अंदर आने-जाने पर रोक लगी थी। बुधवार से शुरू हुई जांच के दौरान भी कर्मचारी अपना काम करते रहे। इस दौरान जांच टीम की तरफ से कोई दखल नहीं दी गई।