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अमर उजाला पड़ताल: कोच में मकड़ों ने बनाया जाला, ताले भी नहीं खुले

Mon, 04 Apr 2022 03:37 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

कबाड़ के कगार पर 24 आइसोलेशन कोच, डूब गए 50 लाख रुपये, आनंदनगर रेलवे स्टेशन पर खड़ी है गोरखपुर के नकहा स्टेशन से गई रैक।
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महराजगंज जिले के आनंदनगर स्टेशन पर धूल फांक रहा रेलवे का आइसोलेशन कोच। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण के दौरान आपात स्थिति के लिए तैयार कराए गए रेलवे के 24 आइसोलेशन कोच कबाड़ होने के कगार पर पहुंच गए हैं। दो सालों से कोच के ताले नहीं खुले। इनमें मकड़ों ने जाला बना लिया है। सीटों पर धूल की परत है। बेडशीट पर लगी मच्छरदानी व टेप उखड़ चुके हैं। कोच का पेंट छूटने लगा है। इस तरह आइसोलेशन कोच के रूप में तैयार करने में खर्च हुए करीब 50 लाख रुपये डूब गए हैं।

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पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल के अधीन गोरखपुर यांत्रिक कारखाने में दो वर्ष पहले 12-12 कोच के दो रैक तैयार की गई थी। कैरिज एंड वैगन शाखा ने पुराने कोचों को एकत्र कर आइसोलेशन कोच तैयार किया। एक रैक को गोरखपुर में नकहा स्टेशन पर और दूसरी रैक को महराजगंज जिले के आनंदनगर स्टेशन पर खड़ा किया गया। 12 जनवरी 2022 को नकहा स्टेशन पर खड़ी रैक को भी आनंदनगर स्टेशन के यार्ड में खड़ा कर दिया गया। अमर उजाला ने रविवार को पड़ताल की तो यह सच सामने आया कि कोच को कभी इस्तेमाल ही नहीं किया गया।

ये व्यवस्थाएं की गईं
आइसोलेशन कोच में ड्रिप चढ़ाने और ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था की गई थी। मिडिल और अपर बर्थ को काटकर हटा दिया गया था। लोअर बर्थ को बेड बनाया गया था। पास में डस्टबिन रखा गया था। कोच में नर्सिंग स्टाफ के लिए कमरे और वॉशरूम भी बनाए गए थे। एक कोच को बनाने में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए थे।
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महराजगंज स्टेशन अधीक्षक आनंदनगर स्टेशन गुफरान अहमद ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल में पुराने कोचों का ढांचा बदलकर 24 आइसोलेशन कोच तैयार किए गए थे। एक से डेढ़ माह में कैरिज एंड वैगन शाखा के कर्मचारी आते हैं और साफ-सफाई करके चले जाते हैं। जब तक कोई निर्देश नहीं आता है, कोच खड़े रहेंगे।  
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