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लॉकडाउन में वायु प्रदूषण हुआ कम: वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में सुनाई देना कोयल की मीठी कूक, वादियों में घुली मिठास

Thu, 20 May 2021 04:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

प्रदूषण कम होने से वातावरण हुआ साफ, बढ़ते प्रदूषण की वजह से पर्यावरण का बिगड़ गया था संतुलन

 
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कोयल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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लॉकडाउन में सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग शिवपुर रेंज के सीमावर्ती वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के लिए अच्छी सौगात लेकर आया है। कोयल की मीठी कूक हसीन वादियों में मिठास घोल रही। सुबह-शाम जानवर जंगल में विचरण करते दिख रहे। बारिश की फुहारों से धूल और गंदगी की परत हटने के बाद पेड़ों की पत्तियां भी अब चमकने लगी हैं। पक्षियों की मधुर आवाज लोगों को बरबस प्रकृति की ओर खींच रही है। जैव विविधता को लोग करीब से देख और महसूस कर रहे हैं।  

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सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के रेंजर अनूप कुमार वर्मा ने बताया कि कोयल की कूक पहले वाहनों के शोर में गुम हो जाती थी। ध्वनि और वायु प्रदूषण की वजह से यह असहज और असामान्य रहते थे, लॉकडाउन के बाद सामान्य हो चुके हैं। प्रदूषण कम होने से वातावरण अब उनके अनुकूल हो गया है।

घने और लंबे पेड़ पर बैठती है कोयल
कोयल सामान्य तौर पर घने और लंबे पेड़ पर बैठती है। कीट और फल कोयल का भोजन है। नर कोयल कूक करता है। वन दरोगा मोमिन अंसारी ने बताया कि बढ़ते प्रदूषण की वजह से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है। इससे पक्षियों का व्यवहार प्रभावित हो रहा है। साथ ही उनकी प्रजनन क्षमता प्रभावित हो रही है।
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घोंसला नहीं बनाती है कोयल

सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगलों में कोयल की सुरीली आवाज सुनाई दे रही है। पेड़ों पर रहने वाला यह पक्षी कभी अपना घोंसला नहीं बनाता बल्कि दूसरे पक्षियों के घोंसले में अंडे देता है। अब कोयल की कुहू-कुहू से हृदय के तार झंकृत हो रहे हैं।

अब ऐसे मेहमान पंछी भी दिखने लगे हैं, जो आबादी से दूर रहते थे। लॉकडाउन की वजह से भीड़ और शोर काफी कम हो गया है। हलचल वाली जगहों पर भी सन्नाटा है। यही पक्षियों को आकर्षित कर रहा है।


 
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