फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिवाली में खूब छूटे पटाखे, फिर भी यहां काबू में रहा वायु प्रदूषण, जानिए क्या इसकी खास वजह

Tue, 17 Nov 2020 09:17 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
विज्ञापन
दिवाली की रात का गोरखपुर शहर का नजारा। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
इस दिवाली भी गोरखपुर शहर में खूब पटाखे छूटे। जहां एक ओर पटाखों की वजह से आकाश रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा, वहीं पटाखों की वजह से शोर भी काफी हुआ।
विज्ञापन


इन सब वजहों से गोरखपुर की हवा की गुणवत्ता भी थोड़ी खराब हुई, लेकिन राहत की बात यह रही कि गोरखपुर का एयर क्वालिटी इंडेक्स खतरनाक स्तर के करीब पहुंच कर रुक गया।

वैसे कल-कारखाने, वाहनों की वजह से गोरखपुर में प्रदूषण स्तर खराब बना रहता है। वहीं दिवाली की रात लखनऊ, वाराणसी, कानपुर आदि शहरों में तो एयर क्वालिटी इंडेक्स अत्यंत ही खराब स्तर तक जा पहुंचा था।
विज्ञापन


संभवत: आतिशबाजी से होने वाले वायु प्रदूषण और इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए गोरखपुरवासियों ने थोड़ी सजगता दिखाई। पछुआ हवा ने भी इसमें थोड़ी राहत पहुंचाई। पछुआ हवा पटाखों की वजह से हुए प्रदूषण को यहां से उड़ाकर अन्यत्र ले गई।

एयर क्वालिटी इंडेक्स बिगड़ने के बावजूद 190 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंचकर रहा। हवा की यह गुणवत्ता अत्यंत खतरनाक स्तर तक पहुंचने से बस थोड़ी सी कम रह गई।

पछुवा हवा की वजह से रही राहत
दिवाली की रात हवा का रुख पछुवा हो गया था। इसकी वजह से आतिशबाजी से हुआ प्रदूषण ट्रांसपोर्ट होकर बिहार की ओर चला गया।

मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि दिवाली की रात हवा की रफ्तार 11 किलोमीटर के आसपास बनी हुई थी। इसकी वजह से यहां प्रदूषण स्तर अन्य वर्षों की तुलना में थोड़ा कम रहा। वहीं दिल्ली और प्रदेश के अन्य शहरों की तुलना में भी हवा की गुणवत्ता थोड़ी बेहतर रही।

विशेषज्ञों ने क्या कहा

गोरखपुर एनवायरमेंटल एक्शन ग्रुप के मौसम विशेषज्ञ कैलाश पांडेय ने बताया कि भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) गोरखपुर के व्यावसायिक क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स जारी करता है। दिवाली के दिन का एक्यूआई 190 दर्ज किया गया। ऐसे में यह एक्यूआई गोरखपुर के व्यावसायिक इलाके का है। इस एक्यूआई में पीएम 2.5, पीएम 10, नाइट्रोजन, सल्फर और कार्बन के आंकड़ों को शामिल किया जाता है।
 
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि हवा का यह इंडेक्स भी सेहत के लिहाज से खराब माना जाता है। अगर एक्यूआई 100 तक है तब यह स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है। अन्यथा यह सांस के मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है। अगर इससे ज्यादा हवा की गुणवत्ता खराब होती है तो लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाती है। ऐसे में घर से बाहर निकलने के लिए मास्क पहनना जरूरी होता है। खैर आज के समय में अधिकतर लोग घर से बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं।

दिल्ली एवं अन्य प्रदेशों का कुछ यूं रहा एयर क्वालिटी इंडेक्स

शहर      एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई)
दिल्ली-               469
नोएडा-              458
गाजियाबाद-        486
ग्रेटर नोएडा-       426
लखनऊ-           303
कानपुर-            328
वाराणसी-           293
इलाहाबाद-        205
गोरखपुर-         190

एयर क्वालिटी इंडेक्स
0-50 - बेहतर
51-100- संतोषजनक
101-200- सामान्य
201-300- खराब
301- 400- बहुत खराब
401-500- गंभीर
विज्ञापन

कुछ यूं बना हुआ है पिछले दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स

तारीख      एक्यूआई (माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर)
9 नवंबर-     155
10 नवंबर -  151
11 नवंबर-   134
 12 नवंबर-  147
13 नवंबर-   152
14 नवंबर-   153
15 नवंबर-   190
16 नवंबर-   161
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें