बुधवार सुबह 10 बजे कानपुर से पार्थिव शरीर लेकर माधवी सेंगर के साथ शाम 5:30 बजे गोरखपुर पहुंचे, जहां एनाटमी हेड डॉ. विवेक मिश्रा ने सहयोगियों के साथ देह को ससम्मान स्वीकार किया। कानपुर से देह को रवाना करते समय कमला के दोनों पुत्र सर्वेश कुमार मिश्रा और नरेश कुमार मिश्रा सहित मोहन बिहारी द्विवेदी और उनके रिश्तेदार मौजूद थे।
कानपुर की दधीचि देहदान संस्थान ने वर्ष 2003 से लोगों को देहदान के लिए प्रेरित किया है। संस्था अब तक प्रदेश में कुल 247 पार्थिव शरीर चिकित्सा संस्थानों को उपलब्ध करा चुका है। साथ ही 3,200 से अधिक लोगों ने देहदान करने का शपथ पत्र भरा है। इनमें महिलाओं की भागीदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। संस्था ने अब तक 800 से अधिक नेत्रहीन लोगों को निशुल्क कार्निया प्रत्यारोपण भी कराया है।
तीन साल बाद मिला एम्स को शरीर
दधीचि देहदान संस्थान ने अक्तूबर 2019 में एम्स को पहला शरीर ज्योतिमा दीक्षित का उपलब्ध कराया था। इसके बाद डॉ. संतलाल की देह दिसंबर 2019 में दान की गई। कोरोना के कारण तीन साल तक कोई दान नहीं हो सका। तीसरा देहदान बुधवार को हुआ है।