- अब तक 25 महिलाओं का आरटीएमएस तकनीक से किया गया इलाज
- ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर के मरीजों को चुंबकीय तरंगों से मिल रहा आराम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। एम्स में ऑब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) से पीड़ित मरीजों को चुंबकीय तरंगों से आराम मिल रहा है। न्यूरो मॉड्यूलेशन तकनीक में चुंबकीय तरंगों का इस्तेमाल कर मरीजों का मानसिक संतुलन ठीक किया जा रहा है। एक साल के अंदर 25 ओसीडी मरीजों पर आरटीएमएस (रिपिटिटिव ट्रांसक्रैनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन) तकनीक सफल रही है।
इस पर एम्स के मनोचिकित्सा विभाग ने शोध भी शुरू किया है। शुरुआती अध्ययन में ओसीडी के इलाज में दवाओं से ज्यादा असरदार आरटीएमएस तरीके पाई गई है। मनोचिकित्सा विभाग में इलाज के लिए पिछले साल ओसीडी पीड़ित 25 मरीज आए, जो कई जगहों पर इलाज करा चुके थे लेकिन बीमारी जा नहीं रही थी। एम्स ने इन मरीजों का इलाज शुरू किया तो पता चला किसी को बार-बार हाथ धोने, किसी को साफ-सफाई तो किसी को अंधेरे में रहने की आदत है।
एम्स ने शुरुआती चरण में दवाइया देने के साथ काउंसलिंग शुरू की लेकिन कोई राहत नहीं मिली। इन मरीजों में ओसीडी का लेवल गंभीर श्रेणी में था। एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. मनोज पृथ्वीराज ने बताया कि इसके बाद फैसला लिया गया कि ओसीडी पीड़ित इन मरीजों का इलाज न्यूरो मॉड्यूलेशन तकनीक के जरिए किया जाएगा। इस तकनीक में आरटीएमएस के जरिये चुंबकीय तरंगें दी गई। असर यह हुआ कि मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाओं की गतिविधियां धीरे-धीरे बदलने लगीं। एक-एक मरीज को 40 से 50 बार चुंबकीय तरंगे दी गई, जो हर सप्ताह चलती रही। अब मरीज उन आदतों से मुक्ति पाए गए हैं, जो ओसीडी में तब्दील हो चुकी थी।