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एम्स: अल्ट्रासाउंड कराना है तो तीन महीने बाद का मिलेगा नंबर

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- निजी कंपनी के सहयोग से चलता है अल्ट्रासाउंड सेंटर
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- केवल इमरजेंसी वाले मरीजों का ही तत्काल में होता है अल्ट्रासाउंड


अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। एम्स की हालत भी बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल जैसी होती जा रही है। मरीजों को पर्ची का नंबर लगवाने से लेकर जांच कराने तक में दुश्वारी झेलनी पड़ रही है। अगर डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड की जांच लिख दी तो फिर तीन महीने बाद का नंबर आएगा।
एम्स में अल्ट्रासांउड की व्यवस्था एक निजी कंपनी के हाथ में है। पीपीपी मोड पर इसका संचालन हो रहा है, जिसमें से इस वक्त पांच डॉक्टर हैं। इसमें से दो डॉक्टर इसका संचालन करने वाली फर्म से जबकि, तीन एम्स की तरफ से नियुक्त हैं। लेकिन, अभी यहां हर दिन केवल 50 से 60 जांच ही हो पा रही है। इसमें से भी 20 जांच तो हर दिन इंडोर में भर्ती मरीजों की होती है। शेष ओपीडी और इमरजेंसी वार्ड में आए मरीजों की जांच की जाती है। अस्पताल कर्मियों का कहना है कि अभी करीब 1500 वेटिंग है, इसलिए नए मरीजों को जुलाई के अंतिम सप्ताह में डेट मिल रही है।
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पिछले दिनों इंडोर मरीज के साथ हुआ था दुर्व्यहार
ओपीडी में आए लोग तो दिक्कत झेल ही रहे हैं, जो मरीज भर्ती हो रहे हैं, उनकी भी हालत कोई पूछने वाला नहीं है। बिछिया के एक बुजुर्ग को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टर ने पैरा मेडिकल स्टॉफ के भरोसे छोड़ दिया। स्टाफ ने इंजेक्शन लगाने के लिए हाथ में इतने छेद किए कि खून निकलने से बुजुर्ग के कपड़े रंग गए। बड़ी मुश्किल से आधी रात को परिजन स्वयं मरीज को वहां से हटाकर निजी अस्पताल ले गए, तब जाकर उसकी जान बची।
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