फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एम्स : आठ माह की गर्भवती महिला में मिला अत्यंत दुर्लभ ए-थ्री ब्लड ग्रुप

विज्ञापन
विज्ञापन
बॉम्बे ब्लड ग्रुप के बाद अब एम्स में ए-थ्री सबग्रुप की पहचान
विज्ञापन

33 हजार में एक में पाया जाता है
गोरखपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग ने आठ माह की गर्भवती महिला में अत्यंत दुर्लभ ए-थ्री ब्लड ग्रुप (ए रक्त समूह का एक उपसमूह) की पहचान की है। इससे पहले एम्स गोरखपुर में ही बॉम्बे ब्लड ग्रुप की पहचान की जा चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दुर्लभ रक्त समूह लगभग 33 हजार लोगों में से एक में पाया जाता है।
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. सौरभ मूर्ति ने बताया कि ए रक्त समूह के सबग्रुप में लाल रक्त कणिकाओं की सतह पर ए एंटीजन की मात्रा सामान्य रक्त समूह की तुलना में कम होती है। ए-थ्री सबग्रुप को अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। भारत में कुछ क्षेत्रीय अध्ययनों के अनुसार इसकी आवृत्ति लगभग 33 हजार लोगों में एक में पाई जाती है। उन्होंने बताया कि संबंधित मरीज में एंटी-ए1 एंटीबॉडी भी पाई गई है। रक्त में इन तत्वों की पहचान रक्त आधान (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने इस उपलब्धि पर विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रयास सराहनीय हैं। एम्स गोरखपुर पूर्वांचल के लोगों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक और ट्रांसफ्यूजन सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के दुर्लभ रक्त समूहों की पहचान संस्थान की उत्कृष्टता, सुरक्षा और रोगी-केंद्रित चिकित्सा सेवा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस दुर्लभ रक्त समूह की पहचान के लिए विभाग की ओर से विस्तृत इम्यूनोहेमेटोलॉजिकल परीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मोनिशा, सीनियर रेजिडेंट डॉ. निरंजन और जूनियर रेजिडेंट डॉ. वर्षा सहित विभाग की पूरी टीम शामिल रही।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें