गोरखपुर। एम्स प्रशासन ने मरीजों की बढ़ती परेशानियों को देखते हुए मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के प्रवेश पर रोक लगा दी है। बीते दिनों एम्स में इलाज कराने आने वाले मरीजों को महंगी ब्रांडेड दवाओं की पर्ची थमाई जा रही थी, जिससे उनके इलाज का खर्च काफी बढ़ गया था। सस्ती और प्रभावी जेनरिक दवाओं के सरकारी निर्देशों के बावजूद कई डॉक्टर ब्रांडेड दवाएं लिख रहे थे, जिससे मरीजों पर हजारों रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
केंद्र सरकार और एम्स प्रबंधन लगातार जेनरिक दवाओं को बढ़ावा देने के निर्देश जारी कर रहा है लेकिन मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अब प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। एमआर के अस्पताल परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के बाद डॉक्टरों पर बाहरी प्रभाव कम होगा और मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जा सकेगा।
एम्स की मीडिया प्रभारी डॉ. आराधना सिंह ने बताया कि मरीजों की बेहतरी और किफायती उपचार सुनिश्चित करने के लिए यह फैसला लिया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण और सुलभ चिकित्सा उपलब्ध कराना है। यह प्रतिबंध उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।