आरोप के मुताबिक अनुशासनात्मक समिति ने पाया है कि प्रो. गुप्त अक्तूबर 2022 के निलंबन के बाद भी अपने आचरण में कोई सुधार नहीं कर रहे हैं न ही नए आरोप पत्र का संतोषजनक जवाब दे रहे हैं। यह कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच की कार्यवाही पूर्ण होने तक प्रो. कमलेश को निलंबित रखा जाएगा। निलंबन अवधि में प्रो. गुप्त संस्कृत विभाग से संबद्ध रहेंगे।
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कुलपति पद के दुरुपयोग का परिणाम है निलंबन- प्रो. कमलेश
प्रो. कमलेश ने उन्हें मिले नोटिस को अपने फेसबुक आईडी पर पोस्ट करते हुए लिखा है, यह अन्याय की पराकाष्ठा है। आज फिर मुझे मेरे आवास पर रात 9 बजे निलंबन का आदेश प्राप्त कराया गया है। कार्य परिषद ने 24 जून की बैठक में हाईकोर्ट के 10 मई के आदेश के अनुपालन में मेरा निलंबन निरस्त किया था। पुन: झूठे और मनगढ़ंत आरोपों के साथ दिया गया यह निलंबन आदेश न केवल उच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना है, बल्कि कार्य परिषद के आदेश की अवहेलना भी। यह निलंबन आदेश कुलपति पद के घोर दुरुपयोग का एक और उदाहरण है।