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पंचांग: त्योहारों के बाद अब लगन.. देवउठनी एकादशी से बैंड-बाजा-बरात

Tue, 21 Nov 2023 01:51 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, भगवान विष्णु पांच महीने की अखंड निद्रा का परित्याग कर 23 को जग जाएंगे। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि समस्त मांगलिक कार्य विष्णु शयन में निषिद्ध है। भगवान के जाग्रत हो जाने के पश्चात ही विवाह सहित समस्त वैवाहिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
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शादी। (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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त्योहारों के बाद अब लोग लगन की तैयारी में जुट गए हैं। पांच महीने बाद भगवान विष्णु 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी पर योग निंद्रा से जागृत होंगे। देव के उठने के साथ ही एक तरफ जहां चातुर्मास का समापन होगा, वहीं दूसरी तरफ तुलसी शालिग्राम का विवाह के साथ विवाह मुहूर्त की शुरुआत हो जाएगी। लगन मुहूर्त की शुरुआत 24 नवंबर से होगी, वहीं इसका समापन 13 दिसंबर को हो जाएगा। इस बीच कुल 13 दिनों तक बैंड-बाजा-बरात के लिए शुभ मुहूर्त होंगे।

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वाराणसी से प्रकाशित हृषिकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन कार्तिक शुक्ल एकादशी का मान संपूर्ण दिन और रात आठ बजकर 21 मिनट तक है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र भी शाम बजकर 23 मिनट है। इस दिन छत्र नामक औदायिक योग है। सूर्योदय की तिथि में एकादशी होने से देवउठनी एकादशी इसी दिन मान्य रहेगा।

देव उठनी एकादशी का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, देवउठनी एकादशी व्रत करने से व्रतियों को सहस्रों अश्वमेध का फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से उसे वीर, पराक्रमी और यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक, पुण्यवर्धक और ज्ञानियों को मुक्तिदायक सिद्ध होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्नता देने वाला और विष्णु धाम की प्राप्ति कराने वाला है। इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों का घर में निवास हो जाता है।
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तुलसी विवाह का होगा आयोजन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही श्रद्धालु तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के श्रीविग्रह के साथ तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाता है। तुलसी के पौधे को गमला आदि में रखकर उसे सजाकर, उसके चारों ओर ईख का मंडप बनाकर उसके ऊपर ओढ़नी या सुहाग की प्रतीक चुनरी चढ़ाएं। वृक्ष को साड़ी में लपेटकर टुकड़ी पहनाकर उसका शृंगार करें। गणपति आदि देवों के साथ भगवान शालिग्राम का पूजन करें। भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा कराएं और आरती के साथ विवाह का उत्सव पूर्ण करें।

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शुरू हो जाएंगे वैवाहिक कार्य
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, भगवान विष्णु पांच महीने की अखंड निद्रा का परित्याग कर 23 को जग जाएंगे। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि समस्त मांगलिक कार्य विष्णु शयन में निषिद्ध है। भगवान के जाग्रत हो जाने के पश्चात ही विवाह सहित समस्त वैवाहिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।

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ये हैं इस साल के लगन मुहूर्त
  • नवंबर 24, 27, 28 और 29 नवंबर
  • दिसंबर: 3, 4, 5, 6,7, 9, 11, 12 और 13 दिसंबर
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