फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उपचुनाव: कांग्रेस और बसपा के बाद भाजपा व सपा से भी ब्राह्मण प्रत्याशी, वोटरों को लुभाने की कोशिश

Wed, 14 Oct 2020 07:38 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।

सार

  • भाजपा ने डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी तो सपा ने पूर्व मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पर लगाया दांव
  • इससे पहले कांग्रेस मुकुंद भाष्कर मणि और बसपा अभय नाथ त्रिपाठी को बना चुकी है उम्मीदवार
विज्ञापन
देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देवरिया में विधानसभा उपचुनाव में चारों प्रमुख दलों ने ब्राह्मण कार्ड खेला है। कांग्रेस और बसपा तो पहले ही ब्राह्मण प्रत्याशी घोषित कर चुकी है, बुधवार को भाजपा और सपा ने ऐलान करके ब्राह्म्ण उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। भाजपा ने संत बिनोवा महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्य प्रकाश मणि त्रिपाठी को तो सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को टिकट दिया है।

विज्ञापन


इससे पहले कांग्रेस मुकुंद भाष्कर मणि और बसपा अभय नाथ त्रिपाठी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। भाजपा प्रत्याशी डॉ. सत्यप्रकाश मणि बैतालपुर के उद्योपुर गांव के मूल निवासी है। लंबे समय से भाजपा में हैं। उनके परिवार में कई शिक्षाविद् हैं। इनमें एक भाई अमर कंटक में कुलपति हैं।

जिला पंचायत सदस्य के रूप में कार्य करने का अवसर इन्हें मिल चुका है। मृदुभाषी एवं मिलनसार छवि के डॉ. मणि की पहचान एक निर्विवाद व्यक्ति के रूप में है। कौन्तेय नगर की स्थापना कर वहां निर्धन छात्रों को शिक्षा देने का मिसाल कायम की है।
विज्ञापन


 

विज्ञापन

कई समितियों में सदस्य एवं वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में देवरिया विधानसभा क्षेत्र के प्रभारी रह चुके  हैं। बैतालपुर के ब्लाक प्रमुख भी रहे हैं। एक बार निर्दल उम्मीदवार के रूप में विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं।

उधर समाजवादी पार्टी से उम्मीदवार ब्रह्माशंकर त्रिपाठी पांच बार कसया एवं कुशीनगर से विधायक रह चुके हैं। सपा शासनकाल में दो बार कैबिनेट मंत्री रहे हैं। कसया के पिपरा झाम गांव के मूल निवासी ब्रह्माशंकर त्रिपाठी को राजनीति में 50 साल से अधिक का अनुभव है।

राजनीति की शुरूआत 1967 में की। 1989 में जद (जनता दल) से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 1993 में दोबारा विधायक बनने का अवसर उन्हें हासिल हो सका। वर्ष 2002 में सपा से चुनाव लड़कर फिर विधायक बनने का गौरव उन्हें प्राप्त हुआ।

2003 में उन्हें पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दिया। वर्ष 2007 में कसया से चुनाव लड़े और फिर विधायक बनें। परिसीमन के बाद 2012 में कुशीनगर विधानसभा बन गई। जहां से चुनाव लड़कर एक बार फिर जीते।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें