पिछली होली में भी खाद्य सुरक्षा विभाग ने विशेष अभियान चलाकर 70 से अधिक नमूने लिए थी। इनकी रिपोर्ट होली के करीब 15 दिन बाद ही पहुंची। वह भी पूरी नहीं। पूरी रिपोर्ट आने में एक से दो महीने का समय लग गया था। जांच रिपोर्ट में मिठाई से लेकर तेल, मसाला, घी तक के करीब 40 फीसदी नमूने भी फेल पाए गए थे। न्याय निर्णायक अधिकारी यानी एडीएम सिटी कोर्ट में मुकदमा दर्ज हुआ, सभी पर जुर्माना भी लगा मगर तब तक होली में आया बाजार का ज्यादातर माल बिक चुका था।
खूब हुई कार्रवाई, जुर्माने की राशि भी बढ़ी पर मिलावटखोरी न घटी
गत कई वर्षों की तुलना में पिछले साल 2022 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई भी खूब की। 400 से अधिक नमूने लिए गए। इनमें करीब 40 फीसदी नमूने फेल मिले। विभाग ने एडीएम सिटी कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया और तमाम आरोपी कारोबारियों पर पांच हजार से लेकर 70-70 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया।
इसके पहले प्रायः दो से पांच हजार रुपये ही जुर्माना लगाया जाता था। मगर पिछले साल जुर्माने की राशि बढ़ाकर लगाई गई। साल भर में करीब 25 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया। यही नहीं करीब 11 साल पहले बांसगांव तहसील क्षेत्र से लिए दूध के एक नमूने में एक साल की सजा भी सुनाई गई।
अंतिम बार सबसे बड़ी कार्रवाई 21 दिसंबर 2022 को की गई। विभाग ने मानक के अनुसार गुणवत्ता नहीं मिलने या पैकेजिंग नियमों की अनदेखी पर 25 खाद्य कारोबारियों पर 4.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
कानपुर से चोरी-चुपके आ रहा मिलावटी खोया
कानुपर से मिलावटी खोये की बड़ी खेप रोजाना गोरखपुर पहुंच रही है। बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर सख्ती शुरू हुई तो अब मिलावटखोर इसे निजी वाहनों से भी भेज रहे हैं। यहां से यह खोया न केवल गोरखपुर बल्कि महराजगंज, कुशीनगर और नेपाल बार्डर तक सप्लाई होता है। खाद्य सुरक्षा विभाग हर साल खोये की बड़ी खेप पकड़ता भी है लेकिन प्रभावी कार्रवाई न हो पाने से यह सिलसिला नहीं थम रहा।
पिछली होली में भी विभाग ने 17 क्विंटल से अधिक मिलावटी खोया पकड़ा था। इसमें आधे से अधिक खोया नष्ट भी कराया गया। गोलघर क्षेत्र में खोया मंडी पूरी तरह से नकली खोये के लिए जाना जाता है। यह बात खाद्य सुरक्षा विभाग से भी नहीं छिपी और विभाग के अफसर खुले तौर पर इसे स्वीकार भी करते हैं।
वर्ष 2013 में नए खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लागू होने के बाद से खाद्य कारोबारियों को ज्यादा सहूलियत मिल गई। जानकारों का मानना है कि यह कानून पहले की तुलना में ज्यादा लचीला है। इसमें सीधे एफआईआर नहीं दर्ज कराई जा सकती। खाद्य कारोबारी, विक्रेता को पहले नोटिस देना होगा। नमूने लेकर जांच के लिए भेजना होगा और वहां से रिपोर्ट आने के बाद ही कोई कार्रवाई करनी होगी।
मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए जाने वाले नमूनों के मामलों में ही सिविल न्यायालयों में मुकदमा दर्ज होगा। बाकी मामलों यानी मानक के मुताबिक गुणवत्ता नहीं मिलने या फिर पैकेजिंग नियमों की अनदेखी पर न्याय निर्णायक अधिकारी/एडीएम कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है, जहां से पांच लाख रुपये तक का ही अधिकतम जुर्माना लगाया जा सकता है।
खाद्य सुरक्षा विभाग सहायक आयुक्त कुमार गुंजन ने कहा कि मिलावट के खिलाफ विभाग निरंतर कार्रवाई करता है। ऐसा नहीं है कि सिर्फ होली, दिवाली या किसी विशेष त्यौहार पर ही कार्रवाई की जाए। पूरे साल नमूने लिए जाते हैं। सुधार नोटिस जारी किया जाता है। नमूने फेल पाए जाने पर एडीएम सिटी कोर्ट और सिविल कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाता है। जुर्माना भी लगता है। नमूनों की जांच रिपोर्ट आने का समय निर्धारित है। करीब 14 दिन में रिपोर्ट आ जाती है जिसके बाद तत्काल कार्रवाई भी की जाती है। जांच में गुणवत्ता को लेकर संदेह होने पर संबंधित खाद्य सामग्री सीज भी की जा रही है।