उन्होंने बताया कि इस बीच अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी राजीव बग्गा का ख्याल आया। बहुत चिंतन किया, सोचा कि अगर वह दिव्यांग होकर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन सकते हैं तो मेरी बेटी क्यों नहीं? बस यही टर्निंग प्वाइंट था। जब आदित्या चार साल की हुई तो उसे बैडमिंटन का प्रशिक्षण दिलाना शुरू करा दिया। उनके साथ ही वह रोजाना बैडमिंटन का प्रशिक्षण लेने लगी। इस बीच स्कूली शिक्षा चलती रहे, इसके लिए उसका प्रवेश राजेंद्र नगर स्थित मूक-बधिर विद्यालय में करा दिया।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान जिला स्तर से शुरू करके स्टेट, नेशनल और अब इंटरनेशनल प्रतियोगिताओं में वह भाग लेते हुए मेडल जीतने लगी। तब लगा कि उनका फैसला सही था। जब पूरा देश उसके लिए तालियां बजाता है तो आंखों से खुशी के आंसू छलकते हैं। आदित्या, इस समय दिल्ली में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनका सपना ओलंपिक के सिंगल में गोल्ड मेडल जीतने का है।
बैडमिंटन सनसनी बन चुकीं आदित्या की चमक देशभर में फैल चुकी है। आदित्या को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सम्मानित कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सम्मान दिया है। इसके पहले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आदित्या को पांच लाख रुपये देकर पुरस्कृत किया था।