2015 बैच के दरोगाओं की नवंबर 2015 से ट्रेनिंग शुरू हुई थी। उन्होंने नवंबर 2015 को ट्रेनिंग के लिए आमद किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद वर्ष 2017 में उन्हें जिला आवंटित हुआ और अगस्त 2017 में 195 दारोगा गोरखपुर में ज्वाइन किए। लेकिन इन दारोगाओं का पीएनो नंबर 2017 का आवंटित कर दिया। यानी उन्हें 2017 बैच का दरोगा बना दिया। जबकि अन्य जिलों में आमद करने वाले दरोगाओं को 2015 बैच जारी हुआ।
इसी तरह 2017 बैच के दरोगाओं ने 2017 में ट्रेनिंग की। लेकिन जिन लोगों ने ट्रेनिंग पूरी कर अन्य जिलों में आमद किया, उन्हें 2017 बैच मिला और जिन लोगों ने गोरखपुर जिले में आमद किया, उन्हें 2018 बैच का पीएनो जारी कर दिया गया। ऐसे में सर्विस बुक में 2015 बैच के दरोगा दो साल तो 2017 बैच के दरोगा एक साल जूनियर हो गए।
दरोगाओं का आरोप है कि घूस न देने पर पुलिस दफ्तर के बाबुओं ने उनके साथ ऐसा किया। जबकि एसएसपी ने बताया था कि यह मामला लखनऊ से हुआ है इसमें गोरखपुर के बाबू का कोई रोल ही नहीं है।
एडीजी गोरखपुर जोन अखिल कुमार ने कहा कि गोरखपुर में 2015, 2016, 2017 व 2018 बैच के दरोगाओं के पीएनो में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आया है। यह गड़बड़ी कैसे हुई, इसपर विभागीय जांच कराई जा रही है। साथ ही पीएनो ठीक कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसके लिए एसएसपी गोरखपुर को निर्देशित किया गया है कि वह स्वंय इस मामले का जल्द से जल्द निस्तारण कराएं।