शासन की ओर से जारी आदेश के मुताबिक स्कूलों में सबसे पहले प्रार्थना होगी। इसके बाद 40-50 मिनट की क्लास चलाई जाएगी। इसमें बच्चों को जानकारी दी जाएगी कि स्वच्छ पानी का सेवन करें। मच्छरदानी लगाकर सोएं, आसपास गंदगी न होने दें, नाली में पानी जमा न होने दें।
किसी बर्तन में पानी जमा न होने दें। खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं। बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह लें। अगर बुखार के बाद झटका आता है तो तत्काल चिकित्सक के पास पहुंचें। बुखार तेज होने पर सिर पानी से भिंगोकर पट्टी करें। बीमारी से बचाव से जुड़ी जानकारी दी जाएगी।
स्कूलों में जागरूक करने का उद्देश्य
दिमागी बुखार के शिकार सबसे अधिक 12 वर्ष की उम्र तक के बच्चे होते हैं। पांच से 12 वर्ष की उम्र के बच्चों की संख्या परिषदीय स्कूलों में अधिक रहती है। अगर उन्हें बीमारी से बचाव के बारे में जानकारी दी जाएगी तो बीमारी से निपटने में काफी हद तक मदद मिलेगी।
दायरे में आएंगे 2726 परिषदीय विद्यालय
आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 2726 परिषदीय विद्यालय हैं। इसमें लगभग तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। साथ ही लगभग पांच हजार शिक्षक शिक्षण कार्य करते हैं। ऐसे में अगर सभी लोग अभियान से जुड़ेंगे तो बीमारी को रोकना मुमकिन होगा।