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नई शिक्षा नीति : स्कूल के प्रबंधकों ने रखे विचार रट्टा मार पढ़ाई की जगह एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग को देगी बढ़ावा

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नई शिक्षा नीति : स्कूल के प्रबंधकों ने रखे अपने विचार
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रट्टा नहीं, गतिविधि केंद्रित पढ़ाई को मिलेगी तवज्जो
गोरखपुर। कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति को हरी झंडी दे दी है। 34 साल बाद इसमें बदलाव किया गया है। स्कूली शिक्षा को 10+2 की बजाय 5+3+3+4 के चार ग्रुप में बांटा गया है। ये नीति रट्टा मारकर पढ़ाई करने के बजाय गतिविधि आधारित सीखने के अवसर को बढ़ावा देने में कारगर साबित होगी। बच्चों पर पढ़ाई का बोझ कम होगा। उनकी नींव भी मजबूत होगी। भारी भरकम किताबें, होमवर्क, ट्यूशन के तनाव से बच्चों को राहत मिलेगी।
कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थी विज्ञान, कॉमर्स या ह्यूमैनिटीज में से किसी भी विषय की पढ़ाई कर सकेंगे। किताबों की संख्या घट जाने से अभिभावकों को भी फायदा होगा। अमर उजाला संवाददाता ने नई शिक्षा नीति पर स्कूल के प्रबंधकों से उनके विचार जानें। उन्होंने कुछ इस तरह अपनी भावनाएं साझा की हैं-
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शिक्षा नीति दूरदर्शी, सभी होंगे लाभान्वित
स्कूूली शिक्षा को चार हिस्सों में बांटने के ऐतिहासिक फैसले से प्री प्राइमरी से लेकर कक्षा दो तक बच्चे सिर्फ भाषा को ही विषय के रूप में पढ़ेंगे। कक्षा तीन से पांच तक में गणित के साथ कुछ वैकल्पिक विषयों को शामिल किया गया है। कक्षा छह से आठ तक वैकल्पिक विषयों की संख्या बढ़ेगी। 09वीं से12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को किसी भी स्ट्रीम से आगे की पढ़ाई करने में छूट मिलेगी। स्कूलों की स्वतंत्रता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दूरदर्शी शिक्षा नीति से बच्चे, अभिभावक और स्कूल प्रबंधन सभी का हित होगा।
-अजय शाही, डायरेक्टर आरपीएम ग्रुप ऑफ स्कूल्स
किताबें अब बोझ नहीं लगेंगी
भारी-भरकम किताबें और होमवर्क से छात्रों को मुक्ति मिल जाएगी। नई शिक्षा नीति से बच्चे मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनेंगे। ज्यादा किताबें होने से पढ़ाई छात्रों के लिए बोझ बन जाती है। एक्टिविटी बेस्ड लर्निंग से बच्चे मस्ती के साथ-साथ पढ़ाई पर फोकस करते हैं। ऐसी पढ़ाई ज्यादा समय तक उनके दिमाग में मौजूद रहती है। 9 वीं से 12वीं तक में कोई विद्यार्थी साइंस, कॉमर्स या ह्यूमैनिटीज में से किसी भी विषय की पढ़ाई कर सकेगा।
- रोहन, निदेशक, सरमाउंट इंटरनेशनल
प्रोफेशनल शिक्षा और दक्षता पर जोर
अब कक्षा छह से ही बच्चे को प्रोफेशनल और स्किल की शिक्षा दी जाएगी। स्थानीय स्तर पर इंटर्नशिप भी कराई जाएगी। व्यावसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जाएगा। नई शिक्षा नीति बेरोजगार तैयार नहीं करेगी। स्कूल में ही बच्चे को नौकरी के लिए जरूरी प्रोफेशनल शिक्षा मिलेगी। स्टेट रेगुलेटरी बोर्ड के गठन से स्कूल के संचालन, सुरक्षा और स्कूल फीस तय करने के मामलों की निगरानी हो सकेगी। ये एक अहम बदलाव हुआ है। इसके दूरगामी परिणाम होंगे।
- डॉ. अंबरीश चंद्रा, एग्जीक्यूटिव प्रिंसिपल, सेंट पॉल्स स्कूल
तीन स्तरों पर होगा विद्यार्थी का आकलन
बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में बदलाव होंगे। उनका तीन स्तरों पर आकलन किया जाएगा। एक स्वयं छात्र करेगा, दूसरा सहपाठी और तीसरा उनका शिक्षक। नेशनल एसेसमेंट सेंटर-परख बनाया जाएगा, जो बच्चों के सीखने की क्षमता का समय-समय पर परीक्षण करेगा। सौ फीसदी नामांकन के जरिए पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को फिर से दाखिला दिलाया जाएगा। बोर्ड परीक्षा के नंबरों का महत्व अब कम होगा, जबकि कांसेप्ट और प्रैक्टिकल नॉलेज का महत्व ज्यादा होगा। सभी विद्यार्थियों को किसी भी स्कूल में वर्ष के दौरान दो बार बोर्ड परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।
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- डॉ. चारू चौधरी, डायरेक्टर, गोरखपुर पब्लिक स्कूल
खत्म होगा बोर्ड परीक्षा का तनाव
बोर्ड परीक्षाओं को लेकर छात्र हमेशा दबाव में रहते हैं और ज्यादा अंक लाने के चक्कर में कोचिंग पर निर्भर हो जाते हैं। भविष्य में उन्हें इससे मुक्ति मिल सकती है। शिक्षा नीति में कहा गया है कि विभिन्न बोर्ड आने वाले समय में बोर्ड परीक्षाओं के प्रैक्टिकल मॉडल को तैयार करेंगे। जैसे वार्षिक, सेमेस्टर और मॉड्यूलर बोर्ड परीक्षाएं। नई नीति के तहत कक्षा तीन, पांच एवं आठवीं में भी परीक्षाएं होंगी। 10वीं का बोर्ड खत्म होगा और 12वीं में ही बोर्ड परीक्षाएं होंगी।
हेमंत मिश्र, डायरेक्टर, एबीसी पब्लिक स्कूल
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