आरोप है कि मरीज की हालत नहीं सुधरी तो शिवाय हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने तारामंडल के पैरामाउंट हॉस्पिटल के एक डॉक्टर को ऑनकॉल बुलाया। इसके बाद डॉक्टर ने उसे अपने अस्पताल में शिफ्ट करा दिया। पैरामाउंट में दो दिन तक मरीज भर्ती रहा। मरीज के इलाज के नाम पर बिल बनाएं बगैर ही रकम की मांग की गई।
संक्रमित होने का पता चला तो डॉक्टरों ने कहा ले जाइए
इस बीच पैरामाउंट हॉस्पिटल ने कोरोना के लक्षण देखने पर निजी लैब में जांच के लिए नमूना भेजा। गुरुवार को मरीज की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इसके बाद से डॉक्टरों के हाथ पांव फूल गए। डॉक्टरों ने परिजनों से मरीज को ले जाने को कहा। इस पर परिजन नाराज हो गए। परिजनों का आरोप है कि अगर मरीज में कोरोना के लक्षण थे, तो इन्हें सामान्य मरीजों की तरह क्यों भर्ती किया गया। इनका वार्ड अलग होना चाहिए था।
बिना लिखित सलाह के करा दी जांच
इस मामले में लगातार लापरवाही का सिलसिला जारी रहा। बताया जाता है कि प्राइवेट पैथोलॉजी को बुजुर्ग की जांच के लिए कोई लिखित परामर्श (प्रिसक्रिप्शन) ही अस्पताल के डॉक्टर ने नहीं दिया था। जबकि, परिजनों का आरोप है कि से इसके लिए उनसे 4500 रुपये लिए गए। बिना परामर्श के सैंपल पैथोलॉजी को भेजा गया।
जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो पैथोलॉजी ने प्रिसक्रिप्शन के बगैर रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया। इसकी जानकारी पैथोलॉजी के कर्मचारियों ने डॉक्टर और मरीज के परिजनों को दी है। इस पर परिजनों ने जब डॉक्टर से संपर्क किया उन्होंने प्रिसक्रिप्शन देने से इन्कार कर दिया।
आरोप है कि कोरोना के संक्रमण का पता चलते ही डॉक्टर ने मरीज को अस्पताल से बाहर करने का फैसला किया। उन्होंने परिजनों को मरीज को दूसरे अस्पताल में ले जाने के लिए कहा। तब परिजनों ने पुलिस से शिकायत की। मौके पर पुलिसकर्मी पहुंचे, जिसके बाद मरीज को बीआरडी मेडिकल कालेज भेजा गया। जहां पर मरीज को कोविड वार्ड में भर्ती कराते हुए इलाज शुरू करा दिया गया है। बुजुर्ग के बेटे ने बताया कि दोनों अस्पतालों ने लापरवाही की है। शुक्रवार को दोनों अस्पतालों के खिलाफ लिखित शिकायत स्वास्थ्य विभाग से की जाएगी।
शिवाय हॉस्पिटल के संचालक डीके राय ने बताया कि चार दिन पहले गंभीर हालत में मरीज को रेफर कर दिया गया था। अपनी सुरक्षा के लिए एंटी जन किट से बुजुर्ग की जांच की गई थी। जांच में उस वक्त रिपोर्ट निगेटिव आई थी। गुरुवार को पता चला कि उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
पैरामाउंट हॉस्पिटल के संचालक राकेश सिंह ने बताया कि मरीज का इलाज किया जा रहा था। इस बीच कोरोना के लक्षण दिखने पर जांच कराई, तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई। परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। मरीज के परिजनों ने कुछ रुपये भी नहीं दिए। खुद ही हो-हल्ला करने लगे।
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि मामला गंभीर है। इस मामले में लिखित शिकायत मिलने पर दोनों अस्पतालों की जांच कराई जाएगी। दोनों पैथोलॉजी की भूमिका की भी जांच होगी।