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गोरखनाथ मंदिर में हमला: मुर्तजा अब्बासी पर लगा यूएपीए, लखनऊ ट्रांसफर हुआ केस

Sat, 16 Apr 2022 02:10 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

एटीएस को मुर्तजा 16 अप्रैल तक रिमांड पर मिला था। दो दिन तक एटीएस ने मुर्तजा से गोरखपुर में पूछताछ की और बुधवार रात लखनऊ ले गई। अब मुर्तजा को शनिवार को फिर से कोर्ट में पेश किया गया है।
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मुर्तजा को एटीएस की टीम ने गोरखपुर कोर्ट में पेश किया। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखनाथ मंदिर के सुरक्षा कर्मियों पर हमले का आरोपित अहमद मुर्तजा अब्बासी का मामला एनआईए को स्थानांतरित हो सकता है। आमतौर पर ऐसे मामलों की जांच एनआईए ही करती है। इस मामले में एनआईए भी मुर्तजा से पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों का कहना है कि मुर्तजा मामले में यूएपीए की धाराएं जोड़े जाने से मामला एनआईए के दायरे में चला गया है।

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बता दें कि तीन अप्रैल को गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात सिपाहियों अनिल पासवान और गोपाल गौड़ पर मुर्तजा अब्बासी ने बांके से जानलेवा हमला किया था। गोरखनाथ थाने में मुर्तजा के खिलाफ पुलिस ने हत्या की कोशिश, सरकारी काम में बाधा डालने, धार्मिक भावना भड़काने, 7सीएलए एक्ट के तहत केस दर्ज किया था। चार अप्रैल को उसे कोर्ट में पेश किया गया था और पुलिस रिमांड मांगी गई थी, इसके बाद पुलिस को पूछताछ के लिए 11 अप्रैल तक मुर्तजा का रिमांड मिला था।

इस बीच पांच अप्रैल से एटीएस को केस ट्रांसफर हो गया और मुर्तजा एटीएस की कस्टडी में रहा। 11 अप्रैल को एटीएस ने उसे कोर्ट में पेश किया, साथ ही रिमांड और बढ़ाने की मांग की, जिसके बाद कोर्ट ने पांच दिन के लिए रिमांड को और बढ़ा दिया था। शनिवार को मुर्तजा को फिर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
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कोर्ट में 45 मिनट तक चली सुनवाई
मुर्तजा को एटीएस ने कोर्ट में शनिवार को पेश किया। कोर्ट में करीब 45 मिनट तक सुनवाई चली। दोपहर करीब 12:19 बजे एटीएस ने जेल में दाखिल कर दिया। जेल प्रशासन ने उसे हाई सिक्योरिटी बैरक में रखा है।

सीसी टीवी कैमरे की निगरानी में मुर्तजा
गोरखपुर जेल के हाई सिक्योरिटी बैरक में मुर्तजा को रखा गया है। उसकी सीसीटीवी कैमरे से निगरानी हो रही है। दो गार्ड की भी ड्यूटी लगाई है, जो उस पर नजर बनाए हैं। माना जा रहा है कि कभी भी उसे एटीएस लखनऊ लेकर जा सकता है।

जानिए क्या है यूएपीए
यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को रोकना होता है। इसके तहत पुलिस ऐसे अपराधियों या संदिग्ध लोगों को चिह्नित करती है, जो आतंकी गतिविधियों में शामिल होते हैं, आतंकी गतिविधि के लिए लोगों को तैयार करते हैं या फिर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं। ऐसे मामलों में एटीएस/एनआइए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) के पास काफी शक्तियां होती है।

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