फिलहाल, हौशलादास की मौत की जानकारी खजुरी गांव और आसपास के लोगों को भी नहीं है। उनके शव को कब-कहां दफनाया गया या समाधि दी गई, इसकी भी सटीक जानकारी नहीं मिली है। एसओ खजनी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
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खजूरी महंत रामप्रसाद दास ने कहा कि मैं महंत हौशिलादास की लंबे समय से सेवा कर रहा था। हरीश चंद्र दास महंत नहीं हैं। 2016 में ही कबीर पंथ वाराणसी ने मुझे महंत बनाया है। सभी आरोप गलत हैं। महंत हौशिलादास के निधन के बाद उन्हें समाधि दी गई है। इस मौके पर समाज के लोग भी आए थे।
एसपी साउथ अरुण कुमार सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। मामले की जांच कराकर साक्ष्य के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।