दूषित खाना, गंदे पानी में पनपने वाले हेपेटाइटिस-ई वायरस गर्भवतियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। इस वायरस की वजह से गर्भपात का खतरा सबसे अधिक है। हर साल बीआरडी मेडिकल कॉलेज से लेकर महिला अस्पताल में इस वायरस की वजह से गर्भपात के मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने जून से सितंबर के बीच सफाई पर ज्यादा ध्यान देने की सलाह दी है। अगर यह वायरस उन्हें चपेट में लेता है, तो गर्भपात के साथ उनकी जान भी जा सकती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि यह मौसम गर्भवतियों के लिए ज्यादा खतरनाक है। गर्भधारण के दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं। हार्मोंस में बदलाव की वजह से छोटी-छोटी बीमारियां भी शरीर पर असर डालना शुरू कर देती है। यही वजह है कि हेपेटाइटिस-ई वायरस बारिश के मौसम में ज्यादा असर डालती है।
हेपेटाइटिस-ई वायरस संक्रमण के कारण
संक्रमितों के खून चढ़ाने, साफ-सफाई न होने से, संक्रमित जानवरों के अधपके मांस खाने से।
हेपेटाइटिस-ई वायरस के लक्षण
त्वचा का पीला पड़ जाना, जोड़ों में दर्द, लिवर का बढ़ जाना, एक्यूट लिवर फेल्योर, बुखार, पेशाब का रंग गहरा होना, भूख न लगना, उल्टी, लगातार दस्त, थकान और बुखार होना।