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Gorakhpur News: चार दिन की जद्दोजहद, चार घंटे की सर्जरी और फिर लौटी उम्मीद

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गोरखपुर। आम तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ा एक युवक शायद यह नहीं जानता था कि एक पल की चूक उसकी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकती है। बिहार के छपरा निवासी 35 वर्षीय युवक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। पेड़ से गिरने के बाद उसकी रीढ़ की हड्डी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई और वह पैराप्लेजिया का शिकार हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा लेकिन एम्स गोरखपुर के चिकित्सकों ने समय रहते जटिल शल्यक्रिया कर उसे फिर से सामान्य जीवन की ओर बढ़ने का मौका दिया।
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एक जून को हुई दुर्घटना के बाद युवक दर्द और बेबसी के बीच कई अस्पतालों के चक्कर लगाता रहा। हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। आखिरकार तीन जून को उसे एम्स गोरखपुर लाया गया। यहां जांच में सामने आया कि रीढ़ की हड्डी एल-2 स्तर पर बुरी तरह टूट चुकी है और स्पाइनल कॉर्ड पर गंभीर दबाव पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम तुरंत सक्रिय हुई। ट्रामा एवं जटिल शल्यक्रिया विशेषज्ञ डॉ. अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में करीब चार घंटे तक ऑपरेशन चला। सर्जरी के दौरान स्पाइनल कॉर्ड को दबावमुक्त किया गया और रीढ़ को मजबूती देने के लिए आठ स्क्रू तथा दो रॉड लगाए गए।

आठ घंटे बाद करने लगा भोजन
चिकित्सकों की मेहनत का परिणाम जल्द ही दिखाई देने लगा। ऑपरेशन के मात्र आठ घंटे बाद युवक बैठकर भोजन करने लगा। डॉक्टरों का कहना है कि जिस मरीज के लिए बैठ पाना भी मुश्किल माना जा रहा था, वह अब खुद सहारे से उठकर बैठने में सक्षम है। आयुष्मान भारत योजना के तहत उसका पूरा उपचार निशुल्क किया गया। चिकित्सकों को उम्मीद है कि नियमित पुनर्वास और फिजियोथेरेपी से उसकी स्थिति में और सुधार होगा।
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क्या होता है पैराप्लेजिया
पैराप्लेजिया एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) या तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचने के कारण शरीर का निचला हिस्सा आंशिक या पूर्ण रूप से लकवाग्रस्त हो जाता है। इससे व्यक्ति के दोनों पैर और आंतों की कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
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