- कैंट थाने में दर्ज है मामला, पुलिस कर रही जांच
गोरखपुर। मुख्य चिकित्साधिकारी बनकर रुपये मांगने के मामले की जांच ने अब नया रुख ले लिया है। जहां एक ओर सीएमओ ने किसी भी तरह के लेनदेन से साफ इनकार किया था, वहीं पुलिस की जांच में एक अस्पताल संचालक ने रकम देने की बात स्वीकार कर मामले को और गंभीर बना दिया है।
प्रकरण में कैंट थाने में मामला दर्ज है। कुछ दिन पहले एक मोबाइल नंबर से कॉल कर खुद को सीएमओ डॉ. राजेश झा बताकर विभिन्न अस्पताल संचालकों से धनराशि की मांग की गई थी। संदेह होने पर मामला खुला और आधिकारिक तहरीर के आधार पर केस दर्ज किया गया। शुरुआती जांच में सामने आया कि इस्तेमाल किया गया नंबर लखीमपुर खीरी के एक व्यक्ति के नाम पर पंजीकृत है, जबकि तकनीकी सर्विलांस से लोकेशन महाराष्ट्र की मिल रही है।
सीएमओ ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया था कि किसी प्रकार का भुगतान नहीं हुआ है लेकिन कॉल डिटेल और संपर्क में आए लोगों से पूछताछ के दौरान एक निजी अस्पताल संचालक ने पुलिस को बताया कि उसने बताई गई रकम दे दी थी। अब कैंट पुलिस ने उसे संदिग्ध की पहचान के लिए बुलाया है। संचालक ने फिलहाल लखनऊ में होने की बात कही है और होली के बाद गोरखपुर पहुंचकर बयान दर्ज कराने की जानकारी दी है।
15 दिनों की फुटेज सुरक्षित
संभावित लेनदेन की पुष्टि के लिए सीएमओ कार्यालय परिसर और आसपास के 15 दिनों के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर लिए गए हैं। संबंधित व्यक्ति को फुटेज दिखाकर यह स्पष्ट करने का प्रयास होगा कि धन किसे सौंपा गया। इस बीच आरोपी मोबाइल बंद कर भाग गया है। उसकी तलाश में पुलिस टीम ठाणे भेजी गई है। सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि कॉल रिकॉर्ड, सिम पंजीकरण, बैंक खातों और संभावित ट्रांजैक्शन की समानांतर जांच जारी है।