पुलिस मासूम का शव मिलने के बाद से ही परिजनों और करीबियों पर संदेह जाहिर कर रही थी। इसकी वजह यह भी थी कि जिस तरह से शव गायब हुआ था, उसके पीछे का मकसद परिजनों से ही जुड़ रहे थे। बच्ची के शरीर से कपड़े भी गायब नहीं थे, इस वजह से पुलिस दरिंदगी के बिंदु की ओर भी ध्यान नहीं दे रही थी।
पोस्टमार्टम में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं होने पर पुलिस और आश्वस्त हो गई थी। इन सब के बीच एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने सीएमओ से बातचीत कर पोस्टमार्टम को गहनता से कराए जाने का अनुरोध भी किया था। इस वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी विस्तृत तैयार की गई थी।
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उधर, गांव के कृतपुरा टाेले में पूर्व में भतीजी से दुष्कर्म की घटना के बारे में पुलिस को जानकारी हुई। दरअसल, दुष्कर्म पीड़िता की मां ने मासूम के अपहरण व हत्या के मामले में भी अपने देवर पर संदेह जाहिर किया। उसने पुलिस तक सूचना भेजी कि हो सकता है कि उसने ही मासूम के साथ भी दरिंदगी की हो।
यह सूचना मिलते ही पुलिस ने उसके बारे में पता किया तो मालूम हुआ कि पांच अगस्त को ही वह जेल से छूटा और उसी रात से गायब है। फिर एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट को दोबारा गहनता से पढ़ा। पता चला कि पिछले हिस्से में चोट है। फिर उन्होंने पोस्टमार्टम करने वाली डॉक्टरों की टीम से वार्ता की और पुख्ता होने पर आरोपी को उठा लिया। पकड़ में आने के बाद आरोपी ने तोते की तरह घटना को उगल दिया।
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एसएसपी ने बताया कि घटना का सफल अनावरण करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नकद इनाम दिया गया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोपी को सजा दिलाने के लिए जल्द से जल्द साक्ष्यों के साथ चार्जशीट दाखिल की जाएगी। एसएसपी ने बताया कि आरोपी पर रासुका के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। आरोपी के मददगारों को भी नहीं छोड़ा जाएगा।
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घटना में शामिल मिथिलेश की गिरफ्तारी के बाद मृत मासूम बच्ची की मां एक बार फिर दहाड़े मारकर रोने लगी। उसने कहा कि जिसने उसकी बेटी की जिंदगी ली, उसे भी ऐसी ही सजा मिलनी चाहिए। वह पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट हैं, लेकिन आरोपी पर और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पुलिस शुरू से ही मदद कर रही थी। घर से हम लोगों को भी बुलाया गया, लेकिन कोई बदसलूकी नहीं की गई। अब बस एक ही चाहत है कि आरोपी को सख्त से सख्त सजा मिले।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय साइकोलॉजी विभाग एचओडी प्रो. अनुभुति दुबे ने कहा कि कुछ लोगों के पर्सनॉलिटी में क्रोनिक ऑफेंडर (ऐसा व्यक्ति जो अक्सर नियमों और कानूनों का उल्लंघन करता है) पाया जाता है। उन्हें कानून तोड़ने और किसी को तड़पाना अच्छा लगता है। यह मेंटल से भी बड़ा मामला है। मेंटल केस में तो आप सुधार कर सकते हैं, लेकिन इसमें मुश्किल है। इन्हें नैतिकता और अनैतिकता के बारे में कुछ नहीं पता होता। ऐसे लोगों में सुधार बहुत मुश्किल है। इन्हें जब भी मौका मिलेगा, वे घिनौना कृत्य जरूर करेंगे। किसी को तड़पाकर ही इनको खुशी मिलती है। ऐसे व्यक्ति को समाज में रखना बहुत ही खतरनाक है।