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24 करोड़ रुपये की जालसाजी का शक: कंपनी बनाकर निवेश जुटाया, लोगों से रुपये जमा करवाए...खुद लिया कमीशन

Sat, 25 Apr 2026 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

आरोप है कि दोनों ने मोबाइल और लैपटॉप की मदद से एक रुपये के लेनदेन को लाखों रुपये दर्शाते हुए फर्जी रसीदें तैयार की और इसके आधार पर अपने रिश्तेदारों के खातों में लाखों रुपये कमीशन के रूप में डलवा लिए। यह खेल करीब तीन महीने तक चलता रहा। 30 अप्रैल को कंपनी के ऑडिट के दौरान पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ।
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निवेश के नाम पर ठगी - फोटो : AI
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विस्तार
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गुलरिहा क्षेत्र में निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया है। रियल एस्टेट, ज्वेलरी और शेयर मार्केट से जुड़ी एक कंपनी में निवेश के बहाने करीब 24 करोड़ रुपये की जालसाजी किए जाने का आरोप लगा है। मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थानाध्यक्ष गुलरिहा को प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है।
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पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। विश्वजीत श्रीवास्तव ने न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वह रियल एस्टेट, ज्वेलरी और शेयर मार्केट का कार्य करते हैं। वर्ष 2023 में उनकी पहचान कुशीनगर निवासी सोनू जायसवाल से हुई, जो बाद में उनकी कंपनी से जुड़कर फाउंडर के रूप में काम करने लगा।

इसी दौरान सोनू ने अपने रिश्तेदार शिवम जायसवाल से परिचय कराया, जिसे कंपनी में एजेंट के रूप में जोड़ा गया। आरोप है कि सोनू और शिवम जायसवाल मिलकर कंपनी में निवेश कराने के नाम पर लोगों से रुपया लगवाते थे और कमीशन लेते थे। कंपनी का लेखा-जोखा हरिकेश प्रसाद देखते थे।

शिवम की ओर से भेजी गई डिपॉजिट स्लिप सोनू के माध्यम से अकाउंटेंट को भेजी जाती थी। करीब 4.50 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट संदिग्ध पाए गए। जांच में अधिकांश स्क्रीनशॉट फर्जी निकले। जिन यूटीआर नंबरों से लाखों रुपये भेजे जाने का दावा किया गया, उनमें वास्तविक जमा राशि मात्र एक रुपये पाई गई।

आरोप है कि दोनों ने मोबाइल और लैपटॉप की मदद से एक रुपये के लेनदेन को लाखों रुपये दर्शाते हुए फर्जी रसीदें तैयार की और इसके आधार पर अपने रिश्तेदारों के खातों में लाखों रुपये कमीशन के रूप में डलवा लिए। यह खेल करीब तीन महीने तक चलता रहा। 30 अप्रैल को कंपनी के ऑडिट के दौरान पूरे घोटाले का पर्दाफाश हुआ।

आडिट में सामने आया कि कई लोगों की ओर से फर्जी स्क्रीनशॉट के जरिये कुल 24 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया गया। इसके अलावा नवीन श्रीवास्तव और प्रियंका श्रीवास्तव पर भी आरोप है कि उन्होंने निवेशकों से करीब 82 लाख रुपये अपने खातों में मंगाकर निजी उपयोग में खर्च कर लिए।
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प्राथमिकी दर्ज कर कोर्ट को जानकारी देने का आदेश
विश्वजीत श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि स्थानीय पुलिस को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई उसके बाद वह न्यायालय में आए हैं। प्रार्थना पत्र और प्रस्तुत साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध मानते हुए कोर्ट ने प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया। अदालत ने आदेश दिया कि यदि पहले से मुकदमा दर्ज नहीं है तो थानाध्यक्ष गुलरिहा तत्काल दर्ज कर नियमानुसार विवेचना शुरू करें। इसकी रिपोर्ट न्यायालय को उपलब्ध कराएं।
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