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Gorakhpur News: राजा फतेह बहादुर शाही थे स्वतंत्रता संग्राम के पहले नायक

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गोरखपुर। इंडियन नेशनल साइंस एकेडमी के सदस्य व दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहासकार प्रो. जेएन सिन्हा ने कहा कि राजा फतेह बहादुर शाही स्वतंत्रता संग्राम के पहले नायक थे। उन्होंने 1857 की क्रांति से लगभग 90 वर्ष पहले अंग्रेजों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था।
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प्रो. सिन्हा सोमवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की ओर से आयोजित व्याख्यान को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फतेह बहादुर बिहार से आए थे और तमकुहीराज की स्थापना की थी। बक्सर के युद्ध 1764 के दो वर्ष बाद तमकुहीराज से ही उन्होंने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम शुरू किया था। उन्होंने अंग्रेजों को टैक्स देने से इन्कार कर दिया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें अपने किले व सेना को छोड़कर जंगलों में जीवन बिताना पड़ा। जंगल में रहकर उन्होंने सशस्त्र प्रतिरोध किया। लगभग 20,000 सैनिकों की नई फौज खड़ी की, जिसमें लगभग 1000 लोग हुए शहीद हो गए। उन्होंने लगभग 30 वर्षों तक अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र लड़ाई लड़ी। अंग्रेज कभी भी न तो फतेह शाही को पकड़ सके और न ही मार सके।


उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठा में फतेह बहादुर शाही, महाराणा प्रताप के समकक्ष नजर आते हैं। करीब 20,000 जवानों की फौज, 30 साल तक गोरिल्ला युद्ध, लोकल सपोर्ट इंटेलिजेंस, आधुनिक युद्ध तकनीकी का इस्तेमाल आदि उन्हें पहला स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व उनके सशस्त्र विद्रोह को पहला स्वतंत्रता संग्राम घोषित करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उनसे जुड़े साक्ष्य साक्ष्य वारेन हेस्टिंग्स द्वारा बनवाई गई अति संवेदनशील फाइल्स में दर्ज और मौजूदा समय में लंदन की लाइब्रेरी में सुरक्षित है। नेपोलियन बोनापार्ट से फतेह बहादुर शाही के जुड़ाव के सूत्र मिलते हैं।
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प्रो. अनुभूति दुबे ने क्रांतिकारियों के मनोविज्ञान पर प्रकाश डाला। कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कीर्ति पांडेय ने अध्यक्षता की। इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रो. मनोज तिवारी ने स्वागत व डॉ. श्वेता ने संचालन किया।
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